अयोध्या फैसला: क्या कहना है अयोध्यावासियों का..
अयोध्या। अयोध्या के अधिकांश नागरिक चाहते हैं कि अयोध्या मामले के विभिन्न पक्षकारों को हाई कोर्ट के फैसले को मान लेना चाहिए और सुप्रीम कोर्ट नहीं जाना चाहिए, क्योंकि इससे एक बार फिर कानूनी जंग शुरू हो जाएगी और किसी निष्कर्ष पर पहुंचने में और कई साल बर्बाद होंगे।
राम कोट वार्ड के पार्षद हाजी असद अहमद का कहना है, "हमने वह सबकुछ देखा है कि मामले में क्या कुछ हुआ है, जिसमें कि हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने गुरुवार को अपना फैसला सुनाया है.. इस फैसले को आने में 60 वर्ष लगे हैं.. इसलिए हम नहीं चाहते कि फिर से कोई कानूनी लड़ाई शुरू हो जाए। हम इस मामले से जुड़े सभी पक्षों से आग्रह करते हैं कि जनहित में सुप्रीम कोर्ट न जाएं।"
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सेवानिवृत्त शिक्षक अब्दुल कयूम भी ऐसा ही मानते हैं। उन्होंने कहा, "आपको अब महसूस कर लेना चाहिए कि देश का आम नागरिक, खासतौर से यहां के निवासी, नहीं चाहते कि यह विवाद अब और आगे तक जिंदा रहे.. आम जनता बहुत अच्छी तरह जानती है कि इस मामले में उनके लिए जीतने-हारने जैसा कुछ भी नहीं है, जिसे कि अतीत में राजनीतिक पार्टियों द्वारा खूब भुनाया जा चुका है।"
कयूम ने कहा, "युगों पुराने इस विवाद से अयोध्या के लोग बुरी तरह प्रभावित रहे हैं.. यदि आप उनसे पूछें तो वे बताएंगे कि सुरक्षा जांच, फ्लैग मार्च और अन्य तरह के अभियानों के दौरान उनकी जिंदगी किस तरह कटती है।"
अयोध्या मे कोचिंग सेटर चलाने वाले करुणा शंकर कहते हैं, कि युगों पुराने विवाद को जिंदा रखने के बदले, यहां शिक्षा और विकास से संबंधित तमाम मुद्दों पर तत्काल ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है।
नागरिकों का मानना है कि हिंदू संतो और मुस्लिम मौलानाओं को चाहिए कि वे इस बात को सामने रखने के लिए पहल करें कि इस मुद्दे से आम आदमी को कुछ भी नहीं हासिल होने वाला है।












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