कैसे बढ़ाएं आत्मविश्वास

सरश्री तेजपारखी

नई दिल्ली, 1 अक्टूबर (आईएएनएस)। जो विश्वास हमारे मन से बाहर झांक रहा है, उसे कैसे देखा जाए? उसके साथ क्या किया जाए? इंसान को ऐसी कौन-सी समझ दी जाए कि उसके विचार ही बदल जाएं? यदि उसके विचार बदल गए तो पूरे शरीर में जो तरंग उठेगी, वह विश्व की हर उस चीज से संपर्क करेगी, जो सकारात्मक है।

विश्वास की यह तरंग जो आपके अंदर है, वे उन चीजों को आपकी ओर आकर्षित करती हैं, जो आप चाहते हैं। इस तरह सारी सकारात्मक चीजें आपके जीवन में आने लगती हैं।

विश्वास इतना मुख्य है तो विश्वास की शक्ति को समझना कितनी आपातकालीन स्थिति है। इंसान को तुरंत विश्वास की शक्ति मिल जाए, तो उसे विश्वास प्रकट करने दिया जाए। जो हमारे चेहरे से बाहर झांक रहा है, उससे हमारे जीवन में चमत्कार शुरू हो जाएं, क्योंकि सभी चाहते हैं कि उनके जीवन में चमत्कार हों। आप अलग-अलग चमत्कार सुनते हैं तो यही कहते हैं कि 'मेरे जीवन में ऐसा कब होगा? क्या आजकल के युग में चमत्कार संभव है?' हर एक के जीवन में चमत्कार हो सकते हैं, सिर्फ उस इंसान को चमत्कार देखने की आंख मिलनी चाहिए।

चमत्कार कैसे होते हैं, इसकी समझ प्राप्त होनी चाहिए, क्योंकि जो विश्वास आपके अंदर से झांक रहा है, उसे प्रकट होना है। उसके प्रकट होते ही चमत्कार होते हैं। कुदरत नियमों पर काम करती है, उन नियमों के अनुसार इंसान के अंदर विश्वास और श्रद्धा खुली तो चमत्कार हो सकते हैं। अगर विश्वास और श्रद्धा प्रकट नहीं हुई तो कोई चमत्कार नहीं होता। विश्व के विकास की एक ही आस है, वह है विश्वास (विश्व+आस)।

विचार विश्वास का आइना है। मन से जो विचार निकलते हैं, उन्हें देखकर ही पता चलता है कि विचारों के पीछे किस तरह का विश्वास है। इंसान के विचार ही बताते हैं कि उसके अंदर कैसा विश्वास है और विश्वास यह बताता है कि इंसान कितने बड़े काम कर सकता है।

लोगों से जब यह सवाल पूछा जाता है, 'आजकल आपके अंदर कौन से विचार चल रहे हैं?' और वे जवाब देते हैं कि 'सुबह उठकर ऐसे-ऐसे विचार आते हैं' तब उनके विचार उनका आत्मविश्वास बताते हैं। विश्वास वह चीज है, जो हमें कुछ प्राप्त करने के बाद, कुछ प्रयोग व मेहनत करने के बाद मिलता है।

एक इंसान कहता है, 'सुबह उठकर मुझे पहला विचार यह आता है कि मंदिर कितने बजे खुला?' वह इंसान अपने शरीर को मंदिर कहता है। वह यह समझता है कि शरीर एक मंदिर है। उसके लिए सुबह उठना यानी मंदिर का खुलना है। अब इस मंदिर के अंदर से कौन झांकेगा? मंदिर जब बंद होता है तब उसके सामने कोई खड़ा नहीं होता। मंदिर जब खुल जाता है तब उसके सामने अलग-अलग लोग आना शुरू हो जाते हैं। सुबह उठकर यदि आपको यह विचार आए कि 'शरीर उठा यानी मंदिर खुला, अब पुजारी (आप) क्या करे?' तब निश्चित ही ऐसे शरीर से, जिसमें विश्वास भरा हुआ है, सकारात्मक, आनंददायक, सभी के मंगल के लिए कार्य शुरू हो जाते हैं।

सुबह उठने के बाद एक इंसान को विचार आते हैं, 'मैं उठा..मैंने क्या-क्या किया?' और दूसरे इंसान को विचार आता है कि 'मंदिर खुला।' इन दोनों विचारों में छोटा सा फर्क है मगर यही फर्क एक को असफलता दिलाता है और दूसरे को सफलता।

क्योंकि दूसरे इंसान ने अपने आपको जान लिया, इसलिए उसमें यह विचार आया। मगर यह विचार आने के लिए उस इंसान ने न जाने कितने शिविर किए होंगे, घंटों बैठकर सत्य का श्रवण, मनन किया होगा, तब जाकर उससे ऐसी पंक्ति निकलती है। वरना किसी से कहा जाय कि सुबह उठकर आपको यह पंक्ति कहनी है तो वह कहेगा, 'अरे! आपने कहा था लेकिन मुझे याद ही नहीं आया। मुझे तो यह याद आया कि ऑफिस कितने बजे पहुंचना है? कॉलेज में आज क्या सब्मिशन है? मेहमान आएंगे तो क्या खाना बनाए? इसलिए कहा गया कि आपके विचार ही बताते हैं कि आपकी क्या अवस्था है। आपके विचारों के पीछे जो झांक रहा है, आपका आत्मविश्वास बेचारा किस अवस्था में है, यह पता चलता है।'

अगर आपके अंदर विश्वास स्वस्थ अवस्था में है तो आपके विचार कैसे होंगे? स्वस्थ अवस्था में हरे-भरे विचार होंगे। जिस इंसान का विश्वास स्वस्थ है, उस इंसान को देखकर ही लोगों को लगेगा कि यह आम खरीदना चाहिए, यानी इस तरह के लोगों को साथ रहना चाहिए, इनका विश्वास करना चाहिए।

जिन लोगों में विश्वास पूर्ण होता है, उन लोगों का साथ आप अपने आप को सुरक्षित महसूस करते हैं। आप ऐसे लोगों के साथ रहना चाहते हैं। शंकालु, कपटी, अविश्वासी और अनुमानी लोगों से आप दूर भागना चाहते हैं, इसलिए अपने आप से पूछें कि लोग आपके साथ रहना पसंद करते हैं या नहीं? यदि नहीं तो आज से ही अपने विचार बदलें। आपके विचार ही आपके विश्वास की खबर देते हैं। आज से ही अपने विचारों में आत्मविश्वास की महक डालना शुरू करें। किसी भी घटना में वह चाहे नकारात्मक ही क्यों न हो, अपने विचारों को सकारात्मक ही रखें। अपने आप पर विश्वास रखें कि आप वे सब काम कर सकते हैं, जिन्हें करने के विचार आपके अंदर उठते हैं।

मनन करें :

* हमारे अंदर विश्वास ही एक ऐसी तरंग है जो विश्व की हर वस्तु हमारी तरफ आकर्षित करती है, जो हम चाहते हैं।

* इंसान के विचार ही बताते हैं कि उसके अंदर कैसा विश्वास है और उसका विश्वास ही बताता है कि इंसान कितने बड़े काम कर सकता है।

* अगर आपका विश्वास स्वस्थ है तो आपके विचार हरे-भरे होंगे।

* जिन लोगों का विश्वास पूर्ण होता है, उनके साथ आप अपने आपको सुरक्षित महसूस करते हैं।

* अपने आप से पूछें कि लोग आपके साथ रहना पसंद करते हैं या नहीं? यदि नहीं तो आज से ही अपने विचार बदलें।

(डायमंड पॉकेट बुक्स प्रा. लि. द्वारा प्रकाशित पुस्तक 'आत्मविश्वास सफलता का द्वार' से साभार।)

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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