क्या है हाई कोर्ट का फ़ैसला?

फ़ैसला काफ़ी कड़ी सुरक्षा के बीच सुनाया गया है.
हाई कोर्ट की ओर से फ़ैसले का निचोड़ सवाल-जवाब के रूप में मीडिया को दिया गया.
क्या विवादित क्षेत्र भगवान राम की जन्मभूमि है ?
विवादित क्षेत्र ही भगवान राम की जन्मभूमि है. जन्मस्थान पर क़ानूनी राय दी जा सकती है. यह ज़मीन भगवान राम के बचपन के रुप की दैवीय भावना को प्रदर्शित करता है.
वैसे भगवान तो कण कण में है और लोग अपने अपने हिसाब से जब चाहें उनका ध्यान कर सकते हैं. भगवान बिना किसी रुप के भी हो सकते हैं.
क्या विवादित ढांचा मस्जिद था? यह कब बना? किसने बनाया?
विवादित ढांचा बाबर ने बनाया था. कब बना इसके बारे में पुष्ट तारीख नहीं लेकिन यह इस्लाम के उसूलों के ख़िलाफ़ बनाया गया इसलिए इसे मस्जिद नहीं माना जा सकता.
क्या ये मस्जिद किसी हिंदू मंदिर को ढहा कर बनाई गई थी?
यह मस्जिद उस जगह पर बनाई गई जहां पहले एक ढांचा था जिसे तोड़ दिया गया और मस्जिद बनाई गई. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अनुसार पुराना ढांचा हिंदू धार्मिक ढांचा था.
क्या इस इमारत में 22 और 23 दिसंबर 1949 की रात मूर्तियां रखी गई थीं?
मूर्तियां 22 और 23 दिसंबर 1949 की रात में ही विवादित मस्जिद के बीच के गुंबद के नीचे रखी गई थीं.
विवादित क्षेत्र मसलन अंदरुनी और बाहरी परिसर की क्या स्थिति होगी?
अब ये स्थापित है कि जिस संपत्ति पर मामला दायर किया गया है वो रामचंद्र जी की जन्म भूमि है और उन्हें राम के चरण, सीता रसोई और अन्य पूजा स्थलों पर भी पूजा का अधिकार था और ये भी विवादित क्षेत्र में आते हैं. यह भी स्थापित हो चुका है कि हिंदू इस स्थान को राम के जन्म स्थान के रुप में मानते और पूजते रहे हैं और ये स्थान उनके लिए दैवी है और वो अनंत काल से इसे पवित्र मान कर इसकी तीर्थयात्रा करते रहे हैं. वहां विवादित ढांचा बनने के बाद यह स्पष्ट है कि मूर्तियां 22 और 23 दिसंबर 1949 की रात को वहां रखी गईं. यह भी पुष्ट हो चुका है कि बाहरी परिसर हिंदूओं के अधिकार में था और वो वहां पूजा करते रहे हैं. विवादित ढांचे के अंदरूनी हिस्से में भी हिंदू पूजा करते रहे हैं
यह भी स्पष्ट है कि विवादित ढांचे को मस्जिद नहीं माना जा सकता क्योंकि वो इस्लाम के उसूलों के ख़िलाफ़ बना है.












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