कंधमाल दंगा मामले में 15 को तीन वर्ष की कैद
फूलबनी स्थित जिला मुख्यालय की त्वरित अदालत (द्वितीय ) के न्यायाधीश सी.आर. दास ने इन आरोपियों को 26 सितम्बर, 2008 को बालीगुडा थाना अंतर्गत सौटिकिया गांव में बनमाली दीगल एवं अन्य 10 लोगों के घर जलाने के आरोप में सजा सुनाई।
बचाव पक्ष के वकील अजित पटनायक ने आईएएनएस को फोन पर बताया, "अदालत ने उन्हें 4,500 रुपये बतौर जुर्माना अदा करने को भी कहा है। वे यदि यह राशि अदा नहीं करेंगे तो उन्हें सात महीने अतिरक्त कैद की सजा भुगतनी होगी।"
इसी अदालत ने दंगों के दो अन्य मामलों में चार अन्य आरोपियों को सबूत के अभाव में बरी कर दिया।
राजधानी भुवनेश्वर से लगभग 200 किलोमीटर दूर कंधमाल साम्प्रदायिक रूप से संवेदनशील माना जाता है।
यहां 23 अगस्त, 2008 को विश्व हिन्दू परिषद के नेता स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती एवं उनके चार सहयोगियों की उनके आश्रम में हत्या कर दिए जाने के बाद व्यापक हिंसा भड़क उठी थी।
दंगों में कम से कम 38 लोगों की मौत हो गई थी और 25,000 से अधिक ईसाइयों को अपना घर छोड़ना पड़ा था। उग्र भीड़ ने सरस्वती की हत्या के लिए जिम्मेदार मानते हुए ईसाइयों के घरों पर हमला कर दिया था। पुलिस ने हालांकि सरस्वती की हत्या के लिए नक्सलियों को जिम्मेदार ठहराया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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