रिलायंस पावर 2015 तक 25,000 मेगावॉट बिजली उत्पादन करेगी (लीड-1)
समूह की विभिन्न कम्पनियों की वार्षिक आम बैठक के दौरान समूह के अध्यक्ष अनिल अंबानी ने रिलायंस पावर की योजनाओं का खुलासा करते हुए कहा कि कम्पनी अगले 24 महीनों में अपनी उत्पादन क्षमता कई गुना बढ़ाकर 5,000 मेगावॉट और उसके अगले तीन साल में 25,000 मेगावॉट करेगी। कम्पनी की प्रस्तावित योजनाओं के चलते 2015 तक रिलायंस पावर देश की सबसे बड़ी ऊर्जा उत्पादक कम्पनी बन जाएगी।
उन्होंने कहा कि रिलायंस पावर ने पवन और जल विद्युत ऊर्जा के क्षेत्र में भी महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है। फिलहाल कम्पनी की ताप विद्युत उत्पादन क्षमता 600 मेगावॉट है।
अंबानी ने कहा कि कम्पनी ने 10,000 मेगावॉट विद्युत उत्पादन क्षमता की परियोजनाओं के लिए 50,000 करोड़ रुपये की राशि जुटाने के प्रयास सफलतापूर्वक पूरे कर लिए हैं। इस तरह यह कम्पनी देश में सबसे ज्यादा राशि जुटाने वाली कम्पनी बन गई है। जुटाई गई राशि से मध्य प्रदेश की सासन और आंध्र प्रदेश की कृष्णापट्टनम स्थित चार-चार हजार मेगावॉट की अल्ट्रा मेगा विद्युत परियोजनाओं को पूरा करने में मदद मिलेगी।
अंबानी ने कहा, "वर्ष 2015 तक हमारा लक्ष्य अपनी उत्पादन क्षमता 25,000 मेगावॉट करने का है। अगले 24 महीनों में हम अपनी उत्पादन क्षमता 5,000 मेगावॉट करेंगे और उसके अगले तीन साल में इसमें 20,000 मेगावॉट की वृद्धि की जाएगी।"
रिलायंस पावर फिलहाल चार अल्ट्रा मेगा विद्युत परियोजनाओं पर काम कर रही है। जिनमें से तीन सरकार से आवंटित हैं और एक अन्य परियोजना झारखण्ड के तिलैया में स्थापित की जा रही है।
घरेलू कोयला भंडारों से कम्पनी को 20,000 मेगावॉट विद्युत उत्पादन क्षमता के संसाधन उपलब्ध हैं और इंडोनेशिया में कम्पनी के कोयला भंडारों से 10,000 मेगावॉट विद्युत उत्पादन किया जा सकेगा।
कम्पनी ने कहा कि वह आंध्र प्रदेश की समालकोट स्थित 2,400 की विद्युत परियोजना पर 10,000 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। इस परियोजना में संयंत्रों का निर्माण कार्य शुरू हो गया है और वर्ष 2012 तक निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा।
कुल 25,000 मेगावॉट की तापीय विद्युत उत्पादन परियोजनाओं के शुरू होने पर रिलायंस पावर देश की सबसे बड़ी विद्युत उत्पादन कंपनी बन जाएगी। इसके अलावा कम्पनी ने 2015 तक 3,000 मेगावॉट की जल विद्युत और 1,000 मेगावॉट पवन ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य रखा है।
इसके अलावा अंबानी ने कहा कि रिलायंस कैपिटल देश के आधारभूत संरचना क्षेत्र को 50 हजार करोड़ रुपये का ऋण मुहैया कराएगी। इससे कम्पनी को 18 से 20 प्रतिशत का रिटर्न मिलेगा। साथ ही कम्पनी अपने बीमा कारोबार को शेयर बाजार में सूचीबद्ध कराएगी और कम्पनी जल्द ही देश के बैंकिग कारोबार में उतरेगी। अंबानी ने कहा कि रिलायंस कैपिटल अपनी स्थापना के पांच साल में ही देश की सबसे बड़ी गैर बैंकिग वित्तीय कम्पनी बन गई है।
अनिल अंबानी ने कहा, "अगले कुछ साल में भारत में आधारभूत संरचनाओं के विकास के लिए 10 खरब डॉलर या 50 लाख करोड़ रुपये की आवश्यकता है। कम्पनी इस क्षेत्र में वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने में बड़ी भूमिका निभाएगी।"
उन्होंने कहा, "रिलायंस कैपिटल इस क्षेत्र में 18 से 20 प्रतिशत मुनाफे के लिए विक्रेताओं, आपूर्तिकर्ताओं और ठेकेदारों को वित्तीय समाधान उपलब्ध कराएगी।"
अम्बानी ने कहा, "विभिन्न चरणों में हम इस क्षेत्र की 50,000 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को तीन से पांच साल में यह राशि उपलब्ध कराएंगे।"
वहीं समूह की एक अन्य बड़ी और देश की दूसरी सबसे बड़ी दूरसंचार कम्पनी रिलायंस कम्युनिकेशन को अगले तीन साल में कर्ज मुक्त कंपनी बनाने की प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए अंबानी ने कहा कि कम्पनी 'देश में दूसरी दूरसंचार क्रांति (3-जी) का नेतृत्व करेगी।' अंबानी ने कहा कि कंपनी की 26 प्रतिशत हिस्सेदारी रणनीतिक साझेदार को बेचने का विकल्प खुला है साथ ही रिलायंस इंफ्राटेल की टावर इकाई को स्वतंत्र कम्पनी बनाने के लिए समूह सार्वजनिक निर्गम जारी करेगा।
अंबानी ने कहा कि "रणनीतिक और वित्तीय प्रयासों के चलते रिलायंस कम्युनिकेशन के पास नकदी बढ़ेगी और कम्पनी के कर्ज में अगली कुछ तिमाहियों में काफी कमी आएगी।"
उन्होंने कहा, "हम सार्वजनिक निर्गम जारी करने की संभावना पर भी विचार कर रहे हैं। इसके लिए सिक्योरिटी एण्ड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया से जरूरी मंजूरियां हम पहले ही ले चुके हैं।"
अम्बानी ने अन्य क्षेत्रों में प्रवेश की अपनी योजनाओं का भी खुलासा किया। उन्होंने कहा कि कम्पनी स्पॉट ट्रेडिंग कारोबार में एक कमोडिटी एक्सचेंज में 26 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीद चुकी है।
उन्होंने कहा, "मेरा मानना है कि यह बेहतर संभावनाओं वाला क्षेत्र है और हम एक्सचेंज व्यापार सहित सभी क्षेत्रों में प्रवेश की योजना बना रहे हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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