पश्चिमी उप्र में बाढ़ की स्थिति में सुधार, आगरा में गंभीर (लीड-1)
अधिकारियों का कहना है कि बिजनौर, अमरोहा, कांशीरामनगर, मुजफ्फरनगर, बरेली, रामपुर, बुलंदशहर, मेरठ और सहारनपुर जिलों के प्रभावित गांवों में बाढ़ का पानी कम होने से स्थिति में पहले से सुधार हुआ है। इन जिलों के निचले इलाकों के करीब एक हजार से ज्यादा गांवों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया था।
उधर, फरु खाबाद, शाहजहांपुर और बदायूं जिलों में स्थिति जस की तस बनी हुई है। यहां सेना को राहत कार्य में लगाया गया है। बाढ़ से बेघर हुए लाखों लोग प्रशासन के अस्थाई शिविरों व ऊंचाई वाले स्थानों पर शरण लिए हुए हैं।
बिजनौर से अपर जिलाधिकारी (वित्त) रेवा राम सिंह ने मंगलवार को आईएएनएस को बताया कि बाढ़ प्रभावित शेरकोट, चांदपुर और धामपुर तहसीलों में प्रभावित लोगों को राहत शिविरों में पहुंचाया गया है। राहत शिविरों में भोजन से लेकर चिकित्सा सुविधाओं की समुचित व्यवस्था की गई है।
उन्होंने कहा कि नदियों का जलस्तर घटने से हालात में सुधार हुआ है, लेकिन खतरा अभी पूरी तरह से टला नहीं है। प्रशासन की तरफ से प्रभावित जिलों में बाढ़ से हुए नुकसान का सर्वे कराया जा रहा है।
आगरा में मंगलवार को भी यमुना नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर बना रहा, लेकिन अधिकारियों को जल्द ही पानी कम होने की उम्मीद है।
आगरा में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। एक तरफ जहां बाढ़ की वजह से खड़ी फसलों को काफी नुकसान पहुंचा है वहीं जलजनित बीमारियों के फैलने का खतरा पैदा हो गया है।
यमुना का जलस्तर अभी भी खतरे के निशान से चार फुट ऊपर 499 फुट तक पहुंच गया है लेकिन सिंचाई विभाग के अधिकारियों के इस बात के संकेत दिए हैं कि जलस्तर में शाम तक मामूली गिरावट दर्ज की जा सकती है। जिलाधिकारी अमृत अभिजीत ने प्रभावित गावों के प्रमुखों को पानी के कम होने के बाद क्लोरिन का छिड़काव करने का निर्देश दिया।
उधर, घाघरा और शारदा नदियों के जलस्तर में वृद्धि होने की वजह से पूर्वी उत्तर प्रदेश में 12 जिले पहले ही बाढ़ से प्रभावित हैं।
लखनऊ राहत आयुक्त कार्यालय के मुताबिक उत्तर प्रदेश के बाढ प्रभावित कुल 32 जिलों में अब तक बाढ़ और वर्षा से जुड़े हादसों में 90 मौतें हुई हैं। 20 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हुए और करीब 10 लाख हेक्टेयर फसल चौपट हुई है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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