टीपू सुल्तान की 24 पेंटिंग्स की नीलामी
पेंटिंग्स की नीलामी 650,000 से 800,000 पाउंड तक में होने का अनुमान लगाया गया है।
पोल्लिलुर का युद्ध 10 सितम्बर, 1780 को हुआ था। इस महीने इस युद्ध की 230वीं वर्षगांठ थी। यह युद्ध उन युद्धों में से एक था जिसमें ब्रिटिश कंपनी राज को मुंह की खानी पड़ी थी और जिसमें उसके जान-माल का भारी नुकसान हुआ था।
टीपू सुल्तान की पेंटिंग्स पर टिप्पणी करते हुए सूथबे के मध्यपूर्व विभाग के वरिष्ठ निदेशक व प्रमुख एडवर्ड गिब्स ने कहा, "टीपू सुल्तान एक उल्लेखनीय व्यक्तित्व थे और उन्हें दक्षिण एशिया का महान राष्ट्रीय नायक माना जाता है।"
वर्ष 1802 से ये पेंटिंग्स निजी तौर पर संग्रहित थीं। अंतिम बार 1990 में लंदन की 'जमाना गैलरी' में एक प्रदर्शनी 'टाइगर्स राउंड द थ्रॉन, द कोर्ट ऑफ टीपू सुल्तान' में इनका प्रदर्शन हुआ था।
टीपू ने 1784 में अपने पिता की विजय की यादगार के रूप में ये पेंटिंग्स बनवाई थीं। इन्हें दरिया दौलत महल में लगाया गया था। पेंटिंग्स में हैदर अली और टीपू को सजे-धजे हाथियों पर सशस्त्र सेना के साथ दिखाया गया है।
वर्ष 1802 में कैप्टन जॉन विलियम फ्रीज ने इन पेंटिंग्स को अपने पास रख लिया था। फ्रीज परिवार के पास करीब 100 वर्ष तक ये पेंटिंग्स रही थीं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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