नेपाल सरकार जीएमआर के साथ समझौते को तैयार
काठमांडू, 25 सितम्बर (आईएएनएस)। नेपाल की कार्यवाहक सरकार ने माओवादियों की चेतावनी के बावजूद निर्माण क्षेत्र की भारतीय कंपनी, जीएमआर और उसके कंसोर्टियम के साथ 900 मेगावॉट की ऊपरी कर्नाली जल विद्युत परियोजना के लिए समझौते पर हस्ताक्षर करने की तैयारी कर ली है।
माओवादियों ने इस परियोजना के साथ ही 13 अन्य परियोजनाओं के विरोध की चेतावनी दी है, जिनमें से अधिकांश में भारतीय निवेशक शामिल हैं।
ऊर्जा मंत्रालय के प्रवक्ता अनूप कुमार उपाध्याय ने कहा कि ऊर्जा मंत्रालय रविवार को जीएमआर के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम के साथ एक परियोजना विकास समझौते पर हस्ताक्षर करने वाला है।
उपाध्याय ने आईएएनएस को बताया, "हमारी इस समझौते पर शुक्रवार को ही हस्ताक्षर करने की योजना थी, लेकिन विभिन्न कारणों से इसमें देरी हो गई। अब यदि हम रविवार शाम तक समझौते पर हस्ताक्षर नहीं कर लेते तो यह समझौता लटक ताएगा और फिर जीएमआर के प्रतिनिधियों के चीन के दौरे से लौटने के बाद ही इस पर हस्ताक्षर हो पाएगा।"
वर्ष 2008 में जीएमआर इनर्जी लिमिटेड, जीएमआर इंफ्रास्ट्रक्च र और इटालियन-थाई डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के एक कंसोर्टियम ने ऊपरी कर्नाली परियोजना के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय निविदा में सफलतापूर्वक हिस्सा लिया था। उस समय यह परियोजना 300 मेगावाट की थी।
लेकिन संभावनाओं के अध्ययन के लिए करार हो जाने के बाद कंसोर्टियम ने सरकार के सामने प्रस्ताव रखा कि यह परियोजना 900 मेगावॉट में बदली जा सकती है।
नेपाल को इस परियोजना से 12 प्रतिशत मुफ्त बिजली और उत्पादित होने वाली बिजली की बिक्री तथा उत्पादन क्षमता दोनों से उतनी ही रायल्टी प्राप्त होगी।
उपाध्याय ने कहा कि इस सप्ताह माओवादियों द्वारा जारी चेतावनी को ऊर्जा मंत्री प्रकाश शरन महात ने खारिज कर दिया है। माओवादियों ने चेतावनी दी है कि 100 मेगावॉट से ऊपर की जलविद्युत परियोजनाओं के लिए संसद की मंजूरी लेनी होगी, अन्यथा विरोध का सामना करना होगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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