सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल की कवायद व्यर्थ: गिलानी
हुर्रियत के कट्टरपंथी धड़े के नेता गिलानी ने बयान जारी करके कहा कि प्रतिनिधिमंडल कश्मीर समस्या पर केवल भारतीय संविधान के दायरे के अंतर्गत विचार करने वाले लोगों से ही बातचीत करेगा।
गिलानी ने कहा, "हम कश्मीर के लोगों को अपना राजनीतिक भविष्य स्वयं तय करने की आजादी के अधिकार के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इस लक्ष्य को भारतीय संविधान के अंतर्गत प्राप्त नहीं किया जा सकता। संविधान में कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है।"
गिलानी ने कहा, "जब तक भारत कश्मीर को एक अंतर्राष्ट्रीय विवादित क्षेत्र नहीं मानता, सेनाओं को वापस नहीं बुलाता और कश्मीर समस्या का हल ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य के आधार पर नहीं करता तब तक किसी भी तरह की बातचीत का कोई अर्थ नहीं होगा, यह व्यर्थ साबित होगी।"
सरकार ने घोषणा की थी कि प्रतिनिधिमंडल जिन लोगों से बातचीत करना चाहेगा उन्हें मुलाकात के लिए निमंत्रण भेजा जाएगा।
हुर्रियत के नरमपंथी धड़े के नेता मीरवाइज उमर फारुख ने कहा कि जब उन्हें निमंत्रण मिलेगा तब वह जनता को अपनी प्रतिक्रिया देंगे।
मीरवाइज ने पत्रकारों से कहा, "मुझे अब तक इस संबंध में कोई आमंत्रण नहीं मिला है। इसलिए अभी यह कहना ठीक नहीं कि मैं प्रतिनिधिमंडल से मिलूंगा या नहीं।"
गृहमंत्रालय द्वारा तैयार किए गए कार्यक्रम के मुताबिक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल सोमवार को हिंसाग्रस्त कश्मीर क्षेत्र का दौरा करेगा और मंगलवार को जम्मू क्षेत्र का दौरा करेगा।
कश्मीर घाटी में हिंसक विरोध प्रदर्शनों और इस पर काबू पाने के लिए सुरक्षाबलों की कार्रवाई में 11 जून के बाद से अब तक 101 लोगों की मौत हो चुकी है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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