बच्ची के पत्र का मुख्य न्यायाधीश ने लिया संज्ञान

मुख्य न्यायाधीश को दो पन्ने के भेजे गए पत्र में कक्षा पांच की छात्रा विपाशा ने लिखा है, "पार्क और खेल के मैदान न होने से स्कूली बच्चों के पास अपना समय टेलीविजन पर बिताने के अलावा कोई और उपाय नहीं है। सरकार को यहां पार्क का निर्माण कराना चाहिए।"

उसने लिखा है कि शिमला में चारों तरफ पत्थरों के जंगल हैं। यहां बच्चों के लिए पार्क या खुला मैदान नहीं है। ऐसे में बच्चे बाहर नहीं निकल पाते और घर में टेलीविजन देखा करते हैं। टेलीविजन देखने से उनके स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है।

वहीं, विपाशा के पत्र पर संज्ञान लेते हुए मुख्य न्यायाधीश कुर्जन जोसेफ और न्यायाधीश राजीव शर्मा की पीठ ने शनिवार को सरकार से इस मामले में कार्रवाई करने के लिए कहा। न्यायालय इस मामले पर अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को करेगा।

अंग्रेजों द्वारा 'पहाड़ों की रानी' का दर्जा प्राप्त शिमला को अधिकतम 16, 000 लोगों के लिए विकसित किया गया था, लेकिन अब यहां दो लाख से अधिक लोग रहते हैं।

भवनों के अत्यधिक निर्माण और विकास की योजनाओं ने यहां की ज्यादातर हरियाली को समाप्त कर दिया है। इसके अलावा पानी की किल्लत और पार्किं ग की समस्याओं में भी इजाफा हुआ है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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