शास्त्रीय गायक पुट्टराज गवई का निधन
गवई का यहां से 480 किलोमीटर दूर उत्तरी कर्नाटक के गडग में उनके आश्रम में निधन हुआ। आश्रम अधिकारियों ने उनके निधन की सूचना दी।
पद्मभूषण सम्मान प्राप्त गवई जन्म के समय से ही नेत्रहीन थे लेकिन इससे उन्हें हिंदुस्तानी संगीत में विद्वत्ता हासिल करने में कोई दिक्कत नहीं हुई। उन्होंने संगीत पर आधारित नाटक, कविताएं और किताबें भी लिखी थीं। गवई कर्नाटक संगीत में भी पारंगत थे।
वह एक आश्रम चलाते थे, जहां गरीब परिवारों के 1,000 से ज्यादा बच्चों को शिक्षा दी जाती है। इन बच्चों में से कई नेत्रहीन हैं।
उनके बीमार होने के बाद गडग में उनके प्रशंसकों और श्रद्धालुओं ने उनके जल्दी स्वस्थ होने की कामना के साथ एक सप्ताह तक विभिन्न प्रकार के अनुष्ठान किए थे।
गवई का जन्म 1914 के मार्च में हुआ था। उन्हें करीब एक सप्ताह पहले नजदीक स्थित बेलगाम के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उन्हें स्वास्थ्य संबंधी कई परेशानियां थीं।
वैसे उनकी हालत ठीक नहीं थी लेकिन फिर भी वह अस्पताल से आश्रम लौट आए थे क्योंकि वह आश्रम में ही अंतिम सांस लेना चाहते थे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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