सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के दौरे तक कश्मीर पर फैसला स्थगित

बैठक में सशस्त्र सेना विशेष शक्तियां अधिनियम (एएफएसपीए) में कटौती पर कोई फैसला नहीं किया जा सका। जम्मू एवं कश्मीर की सत्ताधारी पार्टी नेशनल काफ्रेंस और विपक्षी पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी तथा वाम दलों ने एएफएसपीए में कटौती के पक्ष में आवाज बुलंद की थी लेकिन भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने खुलकर इसका विरोध किया।
प्रधानमंत्री के सरकारी आवास, सात रेसकोर्स पर हुई इस बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, वाम नेता प्रकाश करात तथा भारतीय जनता पार्टी के लालकृष्ण आडवाणी और नितिन गडकरी सहित अन्य नेताओं ने हिस्सा लिया।यह बैठक कश्मीर घाटी की स्थिति पर चर्चा करने के लिए बुलाई गई थी। जहां गत 11 जून से जारी हिंसक प्रदर्शनों में अब तक 88 लोग मारे जा चुके हैं।
सर्वदलीय बैठक को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि घाटी में कुछ प्रदर्शन 'स्वाभाविक' और 'आवेशपूर्ण' हैं लेकिन अन्य कुछ खास गुटों द्वारा योजनाबद्ध रूप से किए जा रहे हैं।घाटी में युवकों और महिलाओं-यहां तक कि बच्चों के भी सड़कों पर उतर कर विरोध प्रदर्शन करने पर दुख व्यक्त करते हुए मनमोहन सिंह ने एक बार फिर से इस बात पर जोर दिया कि जम्मू एवं कश्मीर में स्थायी शांति सिर्फ बातचीत और विचार-विमर्श से ही संभव है।
प्रधानमंत्री ने सशस्त्र सेना विशेष शक्तियां अधिनियम (एएफएसपीए) का कोई उल्लेख नहीं किया। बहुत से कश्मीरी इसे हटवाना चाहते हैं क्योंकि यह सुरक्षा बलों को विशेष शक्तियां देता है।हिंसा में प्राण गंवाने वाले लोगों के सम्मान में मिनट भर का मौन रखने और प्रार्थना के साथ शुरू हुई बैठक में प्रधानमंत्री ने एक बार फिर दोहराया कि उनकी सरकार हर उस व्यक्ति से बातचीत करने को राजी है, जो हिंसा छोड़ दे।
उन्होंने कहा, "हमने बातचीत की प्रक्रिया के अनुकूल माहौल तैयार करने के लिए राज्य सरकार को भी शांति और सार्वजनिक व्यवस्था बहाल करने को कहा है। केन्द्र सरकार इसके लिए हरसंभव सहायता उपलब्ध कराएगी।"जम्मू एवं कश्मीर की दोनों प्रमुख पार्टियों नेशनल कान्फ्रेंस तथा पीपुल्स डेमोकेट्रिक पार्टी (पार्टी) ने भी इस बैठक में हिस्सा लिया।
प्रधानमंत्री ने कहा, "मैंने पहले भी कहा है और फिर दोहरा रहा हूं-कश्मीर में स्थायी शांति और समृद्धि का एकमात्र रास्ता बातचीत और विचार-विमर्श है।"उन्होंने कहा कि यह यकीनन बहुत त्रासद बात है कि हमारे कुछ लोगों ने हाल के कुछ दिनों में यह रास्ता छोड़ दिया है।
प्रधानमंत्री ने हिंसा में घायल होने वालों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना भी की। उन्होंने घाटी में हुई मौतों, लोगों, पुलिसकर्मियों या सुरक्षा बलों की कार्रवाई में घायल होने वालों, आम आदमी की रोजमर्रा की जिंदगी में पड़ रहे व्यवधान तथा टूअर ऑपरेटरों, सेब के किसानों, दिहाड़ी मजदूरों तथा हाउसबोट के मालिकों द्वारा उठाई जा रही तकलीफों पर खेद जाहिर किया।
अमेरिका में कुरान के कथित अनादर की रपट के बाद सोमवार को भड़की हिंसा में मारे गए 18 लोगों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, "मुझे पक्का यकीन है कि ईद के दौरान उसके बाद हजारों मील दूर बैठे एक गुमराह व्यक्ति की कथित कृत्य की वजह से हुए दुर्भाग्यपूर्ण घटनाक्रमों का हम सभी को अफसोस है।"
प्रधानमंत्री ने कहा, "हमें एक-दूसरे से बात करनी होगी। जिन्हें सरकार से शिकायत है उन्हें प्रशासन से बात करनी होगी। लेकिन यह भी सच है कि अर्थपूर्ण बातचीत तभी संभव है जब वातावरण हिंसा और टकराव से मुक्त हो।"प्रधानमंत्री ने कहा कि केन्द्र और राज्य सरकारें राज्य की जनता विशेषकर युवकों से हिंसा त्यागने की अपील कर चुकी हैं। उन्होंने कहा, "मैं वह अपील दोहराता हूं।"
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार की विचार-विमर्श की इस प्रक्रिया के तहत वह समझते हैं कि यह उचित होगा कि जम्मू एवं कश्मीर के जटिल मसले पर विविध राजनीतिक दलों से मार्गदर्शन लिया जाए। उन्होंने कहा, "इस प्रक्रिया को शुरू करने के लिए मुझे आपके विवेक, ज्ञान और अनुभव से लाभान्वित होने की जरूरत है।"
बिना शर्त बातचीत हो :
बैठक के बाद पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती ने कश्मीर पर बिना शर्त बातचीत की घोषणा करने का प्रधानमंत्री से आग्रह किया। उन्होंने संवाददाताओं कहा, "हम प्रधानमंत्री से अपील करते हैं कि वे बिना शर्त बातचीत की घोषणा करें।"
महबूबा ने कहा कि बातचीत शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री और अलगाववादियों को कोई शर्त नहीं रखनी चाहिए। महबूबा ने कहा, "बल्कि सरकार को जन सुरक्षा अधिनियम के तहत गिरफ्तार किए गए युवकों को रिहा कर देना चाहिए। कश्मीरियों को पीड़ा पहुंचा रहे कर्फ्यू को भी उठा लिया जाना चाहिए।"
सशस्त्र सेना विशेष शक्तियां अधिनियम (एएफएसपीए) को हटाए जाने के मुद्दे पर महबूबा ने कहा, "ऊपरी मरहम लगाने के बदले हमारे पास निश्चित रूप से कुछ वास्तविक और ठोस समाधान होना चाहिए।"
महबूबा ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था कि बातचीत मानवता के दायरे में होना चाहिए। हमें उनकी बातों पर गौर करना चाहिए।
महबूबा ने आगे कहा, "सभी पार्टियों को अपने राजनीतिक हित से ऊपर उठना चाहिए। आइए हम सभी मिल कर कश्मीर की जटिल समस्या का समाधान तलाशें।"
प्रधानमंत्री ने उमर की तारीफ की :
बैठक के बाद नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने संवाददाताओं को बताया, "बैठक बहुत अच्छी रही। प्रधानमंत्री ने उमर की सरकार द्वारा किए गए कार्यो की तारीफ की।"
उमर के पिता फारूक ने कहा, "बैठक सफल रही और एक अच्छे वातावरण में संपन्न हुई। जो भी बयान आएगा, वह अच्छा होगा। गृह मंत्रालय और राज्य सरकार द्वारा सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया जाएगा।"
प्रतिनिधिमंडल दौरा करेगा :
केंद्रीय गृह मंत्री पी.चिदंबरम ने कहा, "बैठक में यह निर्णय लिया गया कि हर वर्ग के लोगों से मिल कर हर तरह के विचारों को इकट्ठा करने के लिए एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल कश्मीर घाटी का दौरा करेगा।"
जुड़ाव की भावना से खत्म होगी समस्या :
इसके पहले कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा कि जम्मू एवं कश्मीर भारत का एक अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जुड़ाव की भावना घाटी के संकट व विवाद को समाप्त कर सकती है।गांधी ने सर्वदलीय बैठक में हिस्सा लेते हुए कहा, "जम्मू एवं कश्मीर हमारे देश और लोकतंत्र का एक अभिन्न हिस्सा है। जम्मू एवं कश्मीर के लोग हमारे अपने लोग हैं। वे हमारे नागरिक हैं।"
गांधी ने कहा, "आइए हम लोगों को जोड़ने की भावना प्रदर्शित करें। मुझे विश्वास है कि इस एक मात्र प्रयास से ही सुलह के लिए अवसर तैयार हो सकता है और इस संकट का अंत हो सकता है।"गांधी ने कहा, "मेरी पार्टी जम्मू एवं कश्मीर के लोगों के साथ बैठकर बातचीत और सुलह की प्रक्रिया का समर्थन करती है।" उन्होंने कश्मीर में हो रही जनहानि पर गहरा दुख व्यक्त किया।












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