उप्र के बाढ़ग्रस्त इलाकों में संक्रामक रोगों का कहर
बाढ़ की चपेट में आए बहराइच, लखीमपुर खीरी, गोन्डा बाराबंकी, पीलीभीत व सीतापुर जिलों में संक्रामक रोगों से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने चिकित्सा शिविरों के साथ-साथ सचल दस्तों (चिकित्सक व स्वास्थ्य कर्मियों की टीम) की भी व्यवस्था की है।
गोन्डा के अपर जिलाधिकारी(वित्त) विवेक पांडे ने बुधवार को आईएएनएस को बताया कि जिले की सभी बाढ़ चौकियों पर करीब 20 चिकित्सा शिविर लगाये गये हैं। बीते 10 दिनों में चिकित्सकों ने करीब 5,000 लोगों की जांच कर उनका इलाज किया है। ज्यादातर मामले वायरल बुखार के सामने आये हैं।
पांडे ने कहा कि जिन इलाकों में जलभराव है वहां कीटनाशकों का छिड़काव कराया जा रहा है। गोन्डा में करीब 100 गांवों के 50 हजार से ज्यादा लोग घाघरा नदी से प्रभावित हुए हैं।
बाराबंकी के अपर जिलाधिकारी(वित्त) देवेंद्र पांडे प्रभावित इलाकों मे लगाये गये चिकित्सा शिविरों में 24 घंटे चिकित्सकों को उपलब्ध रहने को कहा है। इसके अलावा सचल दस्ते प्रभावित इलाकों में जाकर काम कर रहे हैं। बाराबंकी में उफनाई घाघरा के कहर से करीब 50 से अधिक गांव जलमग्न हो गये हैं।
बहराइच के जिलाधिकारी रिग्जियान सैंफिल ने बताया कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों को चौबीसों घंटे सतर्क रहने के निर्देश दिये गये हैं। उन्होंने कहा कि पशुओं को संक्रामक रोगों से बचाने के लिए उन्हें टीके लगाये जा रहे हैं।
प्रदेश के बाढ़ग्रस्त जिलों में करीब तीन लाख से अधिक आबादी प्रभावित हुई है। सैकड़ों एकड़ खरीफ की फसल नष्ट हो चुकी है। घाघरा, शारदा, सरयू और यमुना लगातार खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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