सैम पित्रोदा के सपनों का भारत, जहां नहीं छपेंगे कागज के नोट

नई दिल्ली। भारत को आर्थिक सुधारों की सीढ़ी पर चढ़ाने वालों में से अग्रणी सैम पित्रोदा, प्रधानमंत्री के वरिष्ठ सलाहकारों में से एक हैं। सैंम पित्रोदा सार्वजनिक सूचना, अधोसंरचना और उन्नयन पर प्रधानमंत्री के सलाहकार और राष्ट्रीय नवप्रवर्तन परिषद के अध्यक्ष हैं। उनके सपनों का भारत कैसा है और वह भविष्य के भारत को अपनी आंखों से कैसे देखते हैं, ये जानना काफी रोचक है।

पित्रोदा कहते हैं "यदि आप अपने घर और कार्यालय को कागज विहीन बना सकते हैं, तो बैंक, व्यापार और अपने बटुए को क्यों नहीं?" पित्रोदा ने अपने इस विचार को अपनी हालिया प्रकाशित पुस्तक "द मार्च ऑफ मोबाइल मनी : द फ्यूचर ऑफ लाइफस्टाइल मैनेजमेंट" व्यक्त किया है।

पित्रोदा ने कहा, "मोबाइल टेलीफोन सेवा उपलब्ध कराने वाली हर कंपनी इसे अपनाएगी। प्रति उपभोक्ता औसत राजस्व में कमी के कारण डिजिटल बटुआ अधिक उपभोक्ताओं को आकर्षित कर सकता है।" पित्रोदा ने कहा, "मोबाइल क्रांति किसी बड़ी रेलगाड़ी के आने जैसा है। देश में 65 करोड़ से अधिक लोग मोबाइल फोन संपर्क से जुड़े हुए हैं, जबकि चीन में 79.50 करोड़ लोग मोबाइल फोन से जुड़े हुए हैं।

पित्रोदा के मुताबिक, आगे आने वाले 10 सालों में भारत के एक अरब लोग मोबाइल फोन से जुड़ जाएंगे। भारतवासी अपनी सभी जरूरतों के लिए (स्वास्थ्य, शिक्षा और समाज सेवा वगैरह) मोबाइल पर निर्भर होंगे। इसी तरह अगले तीस सालों में कागज के नोटों का अस्तित्व शायद समाप्त हो जाएगा क्योंकि सारा लेने-देन डिजिटल हो जाएगा, लिहाजा कागज के नोट सिर्फ म्यूजियम की चीज हो जाएंगे।

पित्रोदा कहते हैं कि वर्तमान में वैश्विक स्तर पर लगभग 5 अरब मोबाइल फोन का उपयोग हो रहा है जबकि 10 अरब से अधिक क्रेडिट कार्ड एवं डेबिट कार्ड प्रति वर्ष जारी किए जा रहे हैं। इस कारण उनका मानना है कि 30 वर्षो के भीतर कागज के नोटों की अहमियत लगभग समाप्त हो जाएगी।

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