गांवों के गरीब से बदतर स्थिति में हैं शहरी गरीब : शैलजा
नई दिल्ली, 13 सितम्बर (आईएएनएस)। केंद्रीय आवास व शहरी गरीबी उपशमन मंत्री कुमारी शैलजा का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों के गरीबों के मुकाबले शहरी क्षेत्रों के गरीब बदतर स्थिति में हैं। उन्होंने आगाह किया कि अगले 25 वर्षो में शहरी आबादी दोगुना बढ़कर 60 करोड़ हो जाएगी।
शैलजा ने आईएएनएस को दिए एक साक्षात्कार में कहा, "देश के छोटे व बड़े शहरों में तकरीबन 30 करोड़ गरीब आवश्यक सुविधाओं के अभाव में रहते हैं। कई मायनों में शहरी क्षेत्रों में रहने वाले गांवों में रहने वाले गरीबों के मुकाबले बदतर स्थिति में हैं। ग्रामीण गरीबों की ओर विभिन्न पंचवर्षीय योजनाओं में विशेष ध्यान दिया जाता रहा है।"
उन्होंने कहा, "अगले 25 वर्षो में इस शहरी आबादी में और 30 से 40 करोड़ लोगों की वृद्धि होगी।"
शैलजा ने कहा कि शहरी क्षेत्रों के समेकित विकास के लिए शहरों में शारीरिक, वित्तीय और मानव संरचना विकसित करना होगा। साथ ही साथ प्रशासनिक और तकनीकि क्षमताओं में भी सुधार की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि राज्यों ने अब इस बात को समझना शुरू किया है कि बढ़ती शहरी गरीब आबादी का अर्थव्यवस्था, मानव विकास सूचकांक और सामजिक संरचना पर कितना व्यापक असर पड़ रहा है।
उन्होंने बताया कि जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीकरण मिशन के तहत 15.5 लाख आवासों के निर्माण को मंजूरी दी गई है। इनमें से 10 लाख मकान निजी कंपनियों और शहरी स्थानीय निकायों के साथ साझेदारी में निर्मित होंगे।
राष्ट्रपति के अभिभाषण में अगले पांच सालों में देश को झुग्गी-झोपड़ियों से मुक्त करा दिए जाने के जिक्र के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, "यह लक्ष्य अपेक्षित है।"
उन्होंने कहा, "राज्यों को झुग्गी-झोपड़ी वालों को जमीन का अधिकार देने के लिए आगे आना चाहिए। देश को झुग्गी-झोपड़ी मुक्त करने के लक्ष्य को पूरा करने के लिए केंद्र सरकार उन्हें हरसंभव मदद करेगी।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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