विश्वविद्यालय में सीसीटीवी पर बवाल

विश्वविद्यालय में सीसीटीवी पर बवाल

सुबीर भौमिक

बीबीसी संवाददाता, कोलकाता से

पश्चिम बंगाल के जाधवपुर विश्वविद्यालय में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने पर अपनी नाराज़गी ज़ाहिर करने के लिए विश्वविद्यालय में अलग अलग राजनीतिक विचारधारा रखनेवाले छात्र एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.

माना जा रहा है कि विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों के बीच माओवादियों की बढ़ती पैठ के चलते ये कदम उठाया गया है.

प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने विश्वविद्यालय के कुलपति, रजिस्ट्रार और दूसरे वरिष्ठ अधिकारियों का घेराव किया है, जिसकी वजह से ये अधिकारी पिछले 24 घंटों से भी ज़्यादा समय से अपने दफ़्तरों से बाहर नहीं निकल पाए हैं.

कोलकाता विश्वविद्यालय में 'युनाइटेड स्टूडेंट्स डेमोक्रैटिक फ़ोरम्स' की छात्रा लोकेश्वरी दासगुप्ता का कहना है कि, "ये हमारी स्वतंत्रता का सीधा उल्लंघन है. हम आतंकवादी नहीं हैं."

सार्वजनिक तौर पर विश्वविद्यालय के अधिकारी ये नहीं मान रहे हैं कि सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने की वजह विश्वविद्यालय परिसर में बढ़ रही माओवादी गतिविधियाँ हैं.

हालांकि अनाधिकारिक तौर पर अधिकारी ये मानते हैं कि हाल ही में विश्वविद्यालय परिसर में एक माओवादी नेता ने संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया.

यह संवाददाता सम्मेलन उस समय किया गया जब इस नेता को गिरफ़्तार करने की कोशिशें की जा रही थीं.

सुरक्षा की दृष्टि से सीसीटीवी कैमरा लगाए जाने के पीछे ये घटना प्रमुख कारण हो सकती है.

संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करनेवाली देबोलीना घोष जाधवपुर विश्वविद्यालय की पूर्व छात्रा हैं और उन्होंने पुलिस को चुनौती दी थी कि संवाददाता सम्मेलन के दौरान पुलिस उन्हें गिरफ़्तार करके दिखाए.

जाधवपुर विश्वविद्यालय के छात्रों का कहना है कि प्रस्तावित 16 सीसीटीवी कैमरे पूरी तरह पैसों की बर्बादी है.

छात्रो का आरोप है कि एक ओर जहाँ हॉस्टल में उन्हें ख़राब खाना दिया जाता है वहीं दूसरी ओर सीसीटीवी कैमरों पर इतना ख़र्च करने की क्या आवश्यकता है.

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रदीप घोष छात्रों के दबाव में झुकते हुए नज़र नहीं आ रहे हैं.

प्रदीप घोष का कहना है कि छात्र बिना वजह उस मुद्दे पर परेशान हो रहे हैं जिससे उनका कोई वास्ता नहीं है. ये सीसीटीवी कैमरे सुरक्षा के लिए बेहद ज़रूरी हैं और उन्हें एक महीने के अंदर गेट के अलावा दूसरे महत्त्वपूर्ण जगहों पर लगा दिया जाएगा.

छात्र उस प्रस्तावित आचार संहिता का भी विरोध कर रहे हैं जो उन पर लागू की जा सकती है.

1970 के दशक में जबसे पश्चिम बंगाल में माओवाद ने पहले पहल जड़ें पकड़ीं, तबसे जाधवपुर विश्विद्यालय उग्र वामपंथी गतिविधियों का गढ़ रहा है.

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