बिहार में सरकारी कर्मचारियों की हड़ताल जारी

राज्य में चुनाव की घोषणा और सूखे की स्थिति के बीच अराजपत्रित कर्मचारियों के हड़ताल पर चले जाने के कारण कार्य बाधित हो रहे हैं।

इधर, बिहार राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ (गोपगुट) के महामंत्री राजकिशोर राय ने कहा है कि राज्य में विधानसभा चुनाव की घोषणा होने के साथ ही लागू आचार संहिता का इस नैतिक हड़ताल पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि वर्ष 2004-05 में भी ऐसी ही स्थिति आई थी और समझौते के बाद ही हड़ताल समाप्त हुई थी।

एक अन्य नेता रमाबली सिंह ने सरकार को चेतावनी दी है कि वह आचार संहिता का बहाना बनाकर हड़ताल से किसी तरह की छेड़छाड़ ना करे अन्यथा इससे उत्पन्न किसी भी विषम परिस्थिति की जिम्मेवार खुद सरकार और प्रशासन होंगे। उन्होंने कहा कि हड़ताल का प्रभाव सभी जिला कार्यालयों से लेकर प्रखंड कार्यालय तक है। उन्होंने दावा किया है कि सभी सरकारी कार्य ठप्प हैं।

उल्ल्ेाखनीय है कि छठे वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने सहित सात सूत्री मांगों को लेकर बिहार राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ (गोपगुट) के आह्वान पर राज्य के कर्मचारी 23 अगस्त से हड़ताल पर हैं।

गौरतलब है कि हड़ताल तुड़वाने को लेकर राज्य सरकार और कर्मचारी संघों के बीच एक बार हुई वार्ता बेनतीजा रही थी।

इससे पहले राज्यकर्मी सात जनवरी 2009 को अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए थे और 34 दिनों के बाद नौ फरवरी को सरकार से समझौते के बाद उनकी हड़ताल खत्म हुई थी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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