माओवादियों ने बढ़ाई समय सीमा

माओवादियों ने बढ़ाई समय सीमा

मणिकांत ठाकुर

बीबीसी संवाददाता, पटना

बिहार में माओवादियों ने बंधक बनाए गए चारों पुलिसकर्मियों को रिहा करने की समय सीमा अब गुरुवार सुबह 10 बजे तक के लिए बढ़ा दी है.

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के भागलपुर-मुंगेर-बांका के प्रवक्ता अविनाश ने बीबीसी को फ़ोन कर यह जानकारी दी. उन्होंने बताया कि बंदी बनाए गए पुलिसकर्मियों के परिजनों से बात करने के बाद यह फ़ैसला लिया गया है.

उल्लेखनीय है कि बिहार के लखीसराय जिले में रविवार को हुई मुठभेड़ के बाद माओवादियों ने चार पुलिसकर्मियों को बंधक बना लिया था.

माओवादियों ने इन पुलिसकर्मियों को रिहा करने के बदले में बिहार की जेलों में बंद अपने आठ साथियों को रिहा करने की माँग की है.

पुलिस का शक

वहीं बिहार पुलिस मुख्यालय के प्रवक्ता पी के ठाकुर ने बुधवार को कहा,'' माओवादियों ने अबतक जो भी शर्तें रखी हैं, वे मीडिया के माध्यम से हमतक पहुँची हैं. नक्सलियों ने हमसे सीधे कोई बात नहीं की है. इसलिए हमें इन पर संदेह है.''

ठाकुर ने कहा कि पुलिस बंदी बनाए गए पुलिसकर्मियों की रिहाई के लिए अपना काम कर रही है और इसमें कोई ढिलाई नहीं बरती जा रही है.

माओवादी प्रवक्ता अविनाश ने कहा,''हमने समय सीमा को गुरुवार सुबह 10 बजे तक के लिए बढ़ा दिया है. सरकार के पास अब इस विषय पर विचार करने का और मौक़ा है.

उन्होंने बताया,''यह फ़ैसला बंदी बनाए गए पुलिसकर्मियों के परिजनों से बातचीत के बाद लिया गया है. हमें लगा कि इस मामले में जल्दबाजी करने की ज़रूरत नहीं है.''

अविनाश ने कहा,''अगर तय समय सीमा तक हमारी शर्तें नहीं मानी गईं तो हम बंधक बनाए गए पुलिसकर्मियों की हत्या कर देंगे. इसके लिए पूरी तरह सरकार ही ज़िम्मेदार होगी.''

उन्होंने बताया,''बंदी बनाए गए पुलिसकर्मियों के परिजनों ने हमसे संपर्क किया था. हमनें उनसे कहा ये लोग युद्धबंदी की तरह हथियारों के साथ युद्ध के मैदान से पकड़े गए है. इसलिए रिहाई के लिए आप सरकार पर दबाव डालें.''

उन्होंने कहा कि यदि सरकार उनकी बात नहीं मानती तो है इसका मतलब यह हुआ कि सरकार के लिए इनके जीवन की कोई कीमत नहीं है.

प्रवक्ता ने कहा कि सरकार आरोप लगा रही है कि माओवादियों ने बंधक बनाए गए पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी है और एक रणनीति के तहत अपने साथियों को रिहा कराने की बात कर रहे हैं.

सकारात्मक क़दम

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के प्रवक्ता ने कुछ लोगों से मोबाइल फ़ोन पर मेरी बात कराई और कहा कि ये बंधक बनाए पुलिसकर्मी हैं.

फ़ोन पर बात करने वाले लोगों ने मुझसे कहा,'' इस समय एक सितंबर की एक तारीख के दोपहर के दो बजे हम फ़िलहाल सुरक्षित हैं. यह आरोप ग़लत है कि हमारी हत्या कर दी गई है. हमारी बात हमारे परिजनों से भी कराई गई है.सरकार को इस मामले में सकारात्मक क़दम उठाना चाहिए.''

पुलिस प्रवक्ता ने बंदी बनाए गए पुलिसकर्मियों के ज़िदा होने की बात पर संदेह जताया और कहा कि हो सकता है कि यह बात पहले ही रिकॉर्ड कर ली गई हो.

अविनाश ने कहा,''सरकार ने कोई पहल नहीं की है. हमने मुख्यमंत्री निवास में मंगलवार को फोन कर नीतीश कुमार से बात कराने को कहा था. लेकिन हमसे कहा गया कि मुख्यमंत्री आपसे बात करना नहीं चाहते हैं. आपने जो किया है, वह ग़लत है.''

उन्होंने बताया कि हमने लखीसराय के ज़िलाधिकारी को भी टेलीफ़ोन किया था लेकिन उन्होंने यह कहकर बात करने से इनकार कर दिया कि इस मामले में जो करना है वह पुलिस कर रही है.

माओवादी प्रवक्ता ने बताया कि बंदी बनाए गए पुलिसकर्मियों के लिए पुलिस तलाशी अभियान चला रही है. उनका कहना था कि इसमें बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों को उतारा गया है लेकिन ये कामयाब नहीं हो पाएगा.

उन्होंने बताया कि लखीसराय में जो मुठभेड़ हुई थी उसमें 80 माओवादी शामिल थे और 160 लोग मदद के लिए बाहर तैनात थे.

पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि पुलिस मुख्यालय में बुधवार को बंधक बनाए गए पुलिसकर्मियों को रिहा कराने के लिए बुधवार को दिनभर बैठकें होती रहीं. उन्होंने बताया कि पूरे मामले पर मुख्यमंत्री नज़र रखे हुए हैं.

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