अनाज मामला : अदालती फटकार पर नरम पड़े पवार (राउंडअप)

उधर इस मुद्दे पर संसद में जमकर हंगामा हुआ। बाद में पवार ने सदन में कहा कि वह अदालत के आदेश का सम्मान करते हैं। हालांकि उन्होंने कहा कि अभी उन्हें अदालत के फैसले की प्रति नहीं मिली है।

पिछले दिनों गरीबों को मुफ्त अनाज वितरित किए जाने के बारे में न्यायालय के एक आदेश को पवार ने सुझाव करार दिया था। लेकिन न्यायमूर्ति दलवीर भंडारी और न्यायमूर्ति दीपक वर्मा की एक खंडपीठ ने मंगलवार को अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल मोहन पारशरन से कहा, "अपने मंत्री से कहिए कि इस तरह की टिप्पणी न करें। हमने जो कहा वह आदेश है, सुझाव नहीं।"

पवार ने कहा था कि जरूरतमंद लोगों को मुफ्त अनाज बांटने के सर्वोच्च न्यायालय के सुझाव का क्रियान्वयन संभव नहीं है।

उन्होंने न्यायालय के आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था, "सर्वोच्च न्यायालय के इस आदेश का क्रियान्वयन संभव नहीं है।"

सर्वोच्च न्यायालय ने 13 अगस्त को अपने आदेश में कहा था कि केंद्र सरकार भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के गोदामों में सड़ रहे अनाज को गरीब लोगों में मुफ्त बांट दे। न्यायमूर्ति दलवीर भंडारी और न्यायामूर्ति दीपक वर्मा की पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल पारशरन से कहा था, "इसे बर्बाद होने देने के बजाय आप इसे गरीब लोगों में बांट दें।"

न्यायालय ने कहा था कि सरकार यह सुनिश्चित करे कि प्रत्येक राज्य में बड़े गोदाम बनाने के बजाय विभिन्न जिलों में गोदाम बनाए जाएं और सार्वजनिक वितरण प्रणाली की प्रक्रिया को कम्प्यूटरीकृत किया जाए। न्यायालय ने यह आदेश नागरिक अधिकार संगठन पीयूसीएल द्वारा दायर की गई जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया था।

गोदामों में सड़ रहे अनाज को गरीबों में मुफ्त बांटने के सर्वोच्च न्यायालय के आदेश को लागू नहीं किए जाने पर मंगलवार को संसद में जम कर हंगामा हुआ। परिणामस्वरूप लोकसभा की कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी।

विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने लोकसभा में सर्वोच्च न्यायालय के आदेश को लागू नहीं किए जाने का मुद्दा उठाया। स्वराज ने कहा कि सरकार ने आखिर किस आधार पर न्यायालय के आदेश को सुझाव बताया, जबकि स्वयं न्यायालय ने कहा कि यह सुझाव नहीं आदेश है।

उन्होंने कहा, "हम चाहते हैं कि सरकार इस बात का आश्वासन दे कि खाद्यान्नों को गरीबों में बांटा जाएगा। सरकार को इस काम को पूरा करने के लिए एक सप्ताह में योजना प्रस्तुत करनी चाहिए।"

इसी बीच जनता दल (युनाइटेड) के अध्यक्ष शरद यादव ने कहा, "देश की सर्वोच्च अदालत ने स्पष्ट कहा कि उसके द्वारा जारी किया गया निर्णय आदेश है सुझाव नहीं। सरकार को सूखाग्रस्त इलाकों में अनाज का वितरण करना चाहिए।"

स्वराज ने लोकसभा में कृषि मंत्री को बुलाए जाने की मांग की।

बाद में लोकसभा पहुंचे शरद पवार ने कहा कि सरकार सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का सम्मान करती है। उन्होंने कहा कि न्यायालय के निर्णय की प्रति अभी उन्हें प्राप्त नहीं हुई है।

इसके बाद लोकसभा में अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर द्वारा खाद्य सुरक्षा मानक प्राधिकरण द्वारा पीयूए-201 वेरायटी के 40 लाख टन चावल को अस्वीकार किए जाने के मुद्दे पर ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पेश किया गया। कौर ने कहा कि खाद्यान्न सड़ रहे हैं, जबकि देश में लाखों लोग भूखे हैं। उन्होंने कहा कि नई फसल आने से पहले जरूरी कदम उठाए जाने की जरूरत है। क्योंकि और चावल रखने के लिए गोदामों में जगह नहीं है।

इस मुद्दे पर केद्रींय स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद के जवाब से असंतुष्ट अकाली दल के सदस्यों के हंगामे के कारण सदन को दो बार स्थगित किया गया।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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