भोपाल गैस त्रासदी : युद्ध अपराधी की धाराएं लगाई जाए

मालूम हो कि दो-तीन दिसम्बर 1984 की रात को यूनियन कार्बाइड कारखाने से रिसी जहरीली गैस ने एक ही रात में 3000 से अधिक लोगों को मौत की नींद सुला दिया था। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 15 हजार से ज्यादा लोग मर चुके हैं और पीड़ित पांच लाख से ज्यादा है।

सर्वोच्च न्यायालय ने 1996 में आरोपियों के खिलाफ लगाई गई धाराओं को कम कर दिया था, उसी के खिलाफ सीबीआई ने पुनर्विचार याचिका दायर की। इस याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय ने सातों आरोपियों को मंगलवार को नोटिस जारी किए है।

भोपाल गैस पीड़ित महिला उद्योग संगठन के संयोजक अब्दुल जब्बार का कहना है कि सर्वोच्च न्यायालय को गैस हादसे को विरला प्रकरण मानकर विशेष न्यायालय का गठन करना चाहिए ताकि आरोपियों को जल्दी सजा मिल सके, क्योंकि गैस पीड़ित आरोपियों को सजा मिलते देखना चाहते हैं।

जहरीली गैस कांड मोर्चा के संयोजक आलोक प्रताप सिंह का कहना है कि सीबीआई की याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय ने नोटिस जारी किया है, यह एक न्याय की उम्मीद जगाने वाला कदम हो सकता है, मगर जुर्म के मुताबिक सजा मिल पाएगी इसमें कुछ संदेह है।

वे कहते हैं कि गैस त्रासदी एक साजिश थी और यह गैस युद्घ का परीक्षण था लिहाजा आरोपियों पर युद्घ अपराधियों की धाराएं लगाकर सजा मिलनी चाहिए। वे कहते हैं कि गैस हादसे से मरने की मूल वजह हाईड्रोजन सायनाइट थी। यह शोध से स्पष्ट भी हो चुकी है, इसे छुपाया जा रहा है।

भोपाल गैस पीड़ित संघर्ष सहयोग समिति की संयोजक साधना कार्णिक प्रधान कहती है कि सर्वोच्च न्यायालय ने आरोपियों को जो नोटिस जारी किए हैं वह पीड़ितों के संघर्ष का नतीजा है और यह संघर्ष आगे भी जारी रखना होगा। उनका मानना है कि सीबीआई दबाव में सर्वोच्च न्यायालय गई है। वे आगे कहती हैं कि सीबीआई का आगे क्या रूख होता है उस पर नजर रखने की जरूरत है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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