खाद्यान्नों की बर्बादी के मुद्दे पर लोकसभा में हंगामा
विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने लोकसभा में सर्वोच्च न्यायालय के आदेश को लागू नहीं किए जाने का मुद्दा उठाया। स्वराज ने कहा कि सरकार ने आखिर किस आधार पर न्यायालय के आदेश को सुझाव बताया जबकि स्वयं न्यायालय ने कहा कि यह सुझाव नहीं आदेश है।
उन्होंने कहा, "हम चाहते हैं कि सरकार इस बात का आश्वासन दे कि खाद्यान्नों को गरीबों में बांटा जाएगा। सरकार को इस काम को पूरा करने के लिए एक सप्ताह में योजना प्रस्तुत करनी चाहिए।"
इसी बीच जनता दल (युनाइटेड) के अध्यक्ष शरद यादव ने कहा, "देश की सर्वोच्च अदालत ने स्पष्ट कहा कि उसके द्वारा जारी किया गया निर्णय आदेश है सुझाव नहीं। सरकार को सूखाग्रस्त इलाकों में अनाज का वितरण करना चाहिए।"
इससे पहले केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार ने कहा था कि सर्वोच्च न्यायालय ने अपने निर्णय में सुझाव दिया गया है जिसे लागू नहीं किया जा सकता। स्वराज ने लोकसभा में कृषि मंत्री को बुलाए जाने की मांग की।
बाद में लोकसभा पहुंचे शरद पवार ने कहा कि सरकार सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का सम्मान करती है। उन्होंने कहा कि न्यायालय के निर्णय की प्रति अभी उन्हें प्राप्त नहीं हुई है।
इसके बाद लोकसभा में अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर द्वारा खाद्य सुरक्षा मानक प्राधिकरण द्वारा पीयूए-201 वेरायटी के 40 लाख टन चावल को अस्वीकार किए जाने के मुद्दे पर ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पेश किया गया। कौर ने कहा कि खाद्यान्न सड़ रहे हैं जबकि देश में लाखों लोग भूखे हैं। उन्होंने कहा कि नई फसल आने से पहले जरूरी कदम उठाए जाने की जरूरत है क्योंकि और चावल रखने के लिए गोदामों में जगह नहीं है।
इस मुद्दे पर केद्रींय स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद के जवाब से असंतुष्ट अकाली दल के सदस्यों के हंगामे के कारण दो बार सदन को स्थगित किया गया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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