गुजरात पुलिस अधिकारी को फर्जी मुठभेड़ मामले में राहत

गुजरात पुलिस ने वर्ष 1984 में कच्छ जिले में हुई एक कथित फर्जी मुठभेड़ मामले को फिर से खोलते हुए प्रदेश पुलिस महानिदेशक पद के लिए वरिष्ठता क्रम में शीर्ष पर मौजूद शर्मा पर हाल ही में हत्या का मामला दर्ज किया गया था।

वर्ष 1984 में कच्छ जिले में हुई एक कथित फर्जी मुठभेड़ मामले में गुजरात पुलिस ने शर्मा पर लगे आरोप वापस ले लिए थे। उस दौरान शर्मा जिले के पुलिस प्रमुख थे।

शर्मा के खिलाफ जो मामला दर्ज किया गया था उसमें एक उप निरीक्षक शामिल था लेकिन शर्मा को इन आरोपों से बरी कर दिया गया था।

शर्मा ने अपने खिलाफ करीब 25 साल पहले दर्ज की गई प्राथमिकी को खारिज करवाने के लिए उच्च न्यायालय में अपील की थी।

उनके अधिवक्ता ने न्यायालय में कहा कि इस मामले में पहले शर्मा का नाम शामिल नहीं था। वकील ने आरोप लगाया कि पुलिस अधिकारी को प्रताड़ित करने के लिए मौजूदा सरकार ने यह एफआईआर दर्ज की है। शर्मा पर कथित रूप से मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति पूर्वाग्रही होने का आरोप है।

मौजूदा सरकार की नाराजगी के चलते शर्मा को गुजरात प्रदेश भेड़ एवं ऊन विकास निगम का कार्यकारी निदेशक बनाया गया है।

उनके भाई और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी प्रदीप शर्मा को कच्छ जिले में कलेक्टर पद पर नियुक्ति के दौरान भ्रष्टाचार के आरोप में सात महीने से जेल में रखा गया है। दोनों भाइयों को कथित रूप से मोदी सरकार से प्रताड़ित बताया गया है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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