परग्रही हैं, पर अब तक धरती पर नहीं आए

बीजिंग प्लेनेटोरियम (तारामंडल) के संस्थापक झू जिन के मुताबिक परग्रहियों से रेडियो तरंगो के माध्यम से संपर्क साधा जा सकता है।

समाचार पत्र 'चाइना डेली' ने जिन के हवाले से लिखा है कि कुछ ग्रहों पर परग्रही हो सकते हैं। ऐसा इसलिए माना जा रहा है कि तारों के इर्द-गिर्द चूंकि खरबों ग्रह चक्कर लगाते हैं, लिहाजा यह मानना कि केवल धरती पर ही जीवन है, पूरी तरह सच नहीं हो सकता है।

जिन का कहना है कि धरतीवासियों द्वारा अनजान उड़न वस्तुओं (यूएफओ) के देखे जाने के दावों में कोई सच्चाई नहीं है क्योंकि परग्रही अब तक धरती पर आए ही नहीं हैं।

ऐसे में धरतीवासियों के यूएफओ देखने के दावे झूठे हो सकते हैं क्योंकि यह दावा वायुयान, पतंगे या अन्य सामान्य वस्तुओं को देखकर भी किया जा सकता है। साथ ही साथ इस तरह की स्थिति आंखों का भ्रम भी हो सकती हैं।

जिन ने कहा कि ब्रह्मांड इतना बड़ा है कि इसे पार करने के लिए मनुष्य को ध्वनि से भी तेज गति से उड़ने वाले वोएजर-1 जैसे वायुयान से 10,000 वर्ष लग सकते हैं।

वोएजर ने 33 वर्ष के अपने सफर में ब्रह्मांड का एक छोटा सा हिस्सा नापा है। जिन मानते हैं कि अगर किसी सुदूर ग्रह पर परग्रही रहते भी हैं और वे मनुष्यों की तरह समझदार भी हों तो भी उनके धरती पर पहुंचने की संभावना नहीं के बराबर है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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