मुफ्त अनाज मामले पर पवार को न्यायालय की फटकार (लीड-1)
पिछले दिनों गरीबों को मुफ्त अनाज वितरित किए जाने के बारे में न्यायालय के एक आदेश को पवार ने सुझाव करार दिया था। न्यायमूर्ति दलवीर भंडारी और न्यायमूर्ति दीपक वर्मा की एक खंडपीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल मोहन पारशरन से कहा, "अपने मंत्री से कहिए कि इस तरह की टिप्पणी न करें। हमने जो कहा वह आदेश है, सुझाव नहीं।"
पवार ने कहा था कि जरूरतमंद लोगों को मुफ्त अनाज बांटने के सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का क्रियान्वयन संभव नहीं है।
उन्होंने न्यायालय के आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था, "सर्वोच्च न्यायालय के इस आदेश का क्रियान्वयन संभव नहीं है।"
सर्वोच्च न्यायालय ने 13 अगस्त को अपने आदेश में कहा था कि केंद्र सरकार भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के गोदामों में सड़ रहे अनाज को गरीब लोगों में मुफ्त बांट दे। न्यायमूर्ति दलवीर भंडारी और न्यायामूर्ति दीपक वर्मा की पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल पारशरन से कहा था, "इसे बर्बाद होने देने के बजाय आप इसे गरीब लोगों में बांट दें।"
न्यायालय ने कहा था कि सरकार यह सुनिश्चित करे कि प्रत्येक राज्य में बड़े गोदाम बनाने के बजाय विभिन्न जिलों में गोदाम बनाए जाएं और सार्वजनिक वितरण प्रणाली की प्रक्रिया को कम्प्यूटरीकृत किया जाए। न्यायालय ने यह आदेश नागरिक अधिकार संगठन पीयूसीएल द्वारा दायर की गई जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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