प्रत्यक्ष कर संहिता विधेयक लोकसभा में पेश
केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने लोकसभा में प्रत्यक्ष कर संहिता विधेयक पेश किया। कैबिनेट ने 26 अगस्त को इस विधेयक को अपनी मंजूरी दे दी थी। अब इसे समीक्षा के लिए एक संसदीय समिति के पास भेजा जाएगा।
इस विधेयक पर नवंबर में संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान चर्चा होने की संभावना है।
प्रत्यक्ष कर के जरिए सरकार को बड़ी मात्रा में संसाधन प्राप्त होता है और पिछले पांच वर्षो में औसतन 24 प्रतिशत प्रति वर्ष के हिसाब से इसमें वृद्धि हुई है। वित्त वर्ष 2004-05 में प्रत्यक्ष कर के जरिए 132,771 करोड़ रुपये प्राप्त हुए थे, जबकि पिछले वित्त वर्ष में लगभग 378,000 करोड़ रुपये प्राप्त हुए थे।
सरकार ने यह महसूस किया है कि प्रत्यक्ष कर कानून को आधुनिक बनाए जाने की जरूरत है। खासतौर से आयकर अधिनियम को, जोकि अब लगभग 50 वर्ष पुराना हो चुका है। इस तरह सरकार इस विधेयक के जरिए प्रक्रियागत कानूनों को सहज बनाना चाहती है और निवेशक अनुकूल वातावरण तैयार करना चाहती है। इस विधेयक का मकसद कर में छूट और कटौतियों से संबंधित कई सारी व्यवस्थाओं को समाप्त करना है।
मुखर्जी ने पूर्व में कहा भी था, "अनुरूपता में और सुधार लाने के लिए कर कानूनों को सहज, स्थिर और मजबूत बनाने की जरूरत है। कर दरों को आसान बने रहना चाहिए।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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