उत्तर भारत में नदियां उफान पर, उप्र में अब तक 6 मरे (राउंडअप)

उत्तर प्रदेश में बाढ़ से अब तक छह लोगों की मौत हो चुकी है। बिहार के पूर्वी चंपारण में भी एक रिंग बांध टूट गया है वहीं कोसी, गंडक और बागमती नदियां उफान पर हैं।

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में घाघरा नदी पर बने एल्गिन-चरसरी तटबंध के टूट जाने से कुछ ही घंटों में छह गांव जलमग्न हो गए। गोंडा जिले के तीन-चार गांव भी इसकी चपेट में आ गए हैं। राज्य के सिंचाई मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने एल्गिन-चरसरी तटबंध की सुरक्षा में लापरवाही बरतने के आरोप में तीन अभियंताओं को निलंबित कर दिया है।

बाराबंकी के जिलाधिकारी विकास गोसवाल ने रविवार को आईएएनएस को बताया कि तटबंध टूटने से करीब चार हजार लोग प्रभावित हुए हैं, जिन्हें मोटरवोट व नावों की मदद से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाकर राहत सामग्री मुहैया कराई जा रही है।

प्रदेश के लखीमपुर खीरी, सीतापुर, पीलीभीत, गोरखपुर, बस्ती, फरु खाबाद, फैजाबाद जिलों के कई गांवों में घाघरा, शारदा, राप्ती और सरयू का पानी प्रवेश कर गया है। इस इलाके में बाढ़ से अब तक छह लोगों की मौत की पुष्टि हुई है।

बहराइच में घाघरा के कहर से करीब 1.50 लाख बेघर हो चुके हैं। महसी और कैसरगंज तहसील के संगवा, समदर, केवलपुर, बांसगढ़ी, अटोडर, देवगंज, पुंगिया, चूली सहित करीब 80 गांव जलमग्न हो गए हैं। करीब 100 गांवों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है।

बिहार में कोसी, गंडक और बागमती नदियां उफान पर हैं। नदियों का पानी गोपालगंज, पश्चिम चंपारण, मुजफ्फरपुर एवं दरभंगा जिलों के नए इलाकों में प्रवेश कर गया है। गंडक बैराज से 2 लाख 40 हजार क्यूसेक पानी छोड़े जाने के कारण पूर्वी चंपारण में एक रिंग बांध टूट गया। इस कारण सुगौली प्रखंड कार्यालय और थाने में बाढ़ का पानी घुस गया है।

उत्तराखण्ड में इस साल हुई जबर्दस्त बारिश, जलभराव और भूस्खलन से पीड़ित जनता को अब बारिश के बाद होने वाली संक्रामक बीमारियों का भय सता रहा है। सरकार ने बीमारियों से निपटने के लिए निदेशालय स्तर पर एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया है। स्वास्थ्य विभाग के उप सचिव सुनील श्रीपांथरी ने बताया कि सरकार किसी भी स्थिति से निपटने को तैयार है।

ज्ञात हो कि राज्य में पिछले 12 दिनों से लगातार बारिश हो रही है। राज्य का जनजीवन बुरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। राज्य में जानमाल सहित फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। मुख्य मार्गो के साथ-साथ गांवों की सड़कों को भी भारी नुकसान हुआ है।

दिल्ली में पिछले कुछ दिनों से बारिश में कमी आने से यमुना का जलस्तर कम हो रहा है, लेकिन यह अभी तक खतरे के निशान से ऊपर बना हुआ है। सिंचाई एवं खाद्य नियंत्रण विभाग के एक अधिकारी ने आईएएनएस को बताया, "यमुना का जलस्तर 18 सेंटीमीटर कम होकर 205.76 मीटर तक आ गया। शनिवार को यमुना का जलस्तर 205.94 मीटर था।"

मध्य प्रदेश के आधे से ज्यादा जिलों में अब तक औसत से 20 से 50 फीसदी तक कम बारिश हुई है। इसके चलते प्रदेश के आठ प्रमुख बांधों में से पांच बांध केवल 25 प्रतिशत ही भर पाए हैं। कटनी, सीहोर, रीवा और टीकमगढ़ जिलों में औसत के 50 प्रतिशत से भी कम बारिश हुई है।

मौसम विभाग के भोपाल स्थित क्षेत्रीय कार्यालय के मुताबिक मानसून के आगमन के समय से अब तक प्रदेश के अधिकांश इलाकों में औसत से काफी कम बारिश हुई है। प्रदेश में इस साल केवल 599 मिलीमीटर बारिश ही हुई है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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