तृणमूल-नक्सली संबंध के संदेह का कोई कारण नहीं : प्रणब
उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस और नक्सलियों के बीच संबंध के संदेह का कोई कारण मौजूद नहीं है।
मुखर्जी ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री बनर्जी के इस आरोप पर गौर करेंगे कि पश्चिम बंगाल में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) उन इलाकों में हथियार चलाने का प्रशिक्षण देने के लिए शिविर चला रही है जहां संयुक्त सुरक्षा बल नक्सलियों से संघर्ष कर रहे हैं।
संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन में शामिल बनर्जी का बचाव करते हुए मुखर्जी ने कहा, "उन्होंने आरोप लगाया है कि माकपा के कार्यकर्ता हथियारों के प्रशिक्षण के लिए शिविर चला रहे हैं। जो लोग पहले प्रभावित इलाकों से बाहर चले गए थे वह दोबारा संगठित होकर इन इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत कर रहे हैं।"
कोलकाता प्रेस क्लब में एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान मुखर्जी ने कहा, "बनर्जी के इन आरोपों को हम केंद्रीय गृह मंत्री के सामने लाएंगे। गृह मंत्री इस मामले पर गौर करेंगे।"
तृणमूल कांग्रेस की नक्सलियों से सांठगांठ होने के भारतीय जनता पार्टी और वामपंथी दलों द्वारा लगाए गए आरोप के बारे में मुखर्जी ने कहा कि बनर्जी ने इन सभी आरोपों का खंडन किया है।
उन्होंने कहा कि बनर्जी और कई अन्य लोगों का मानना है कि ऐसा कोई नियम नहीं है कि गठबंधन के सदस्यों का किसी मुद्दे पर अलग नजरिया नहीं हो सकता।
मुखर्जी ने कहा, "गठबंधन सरकार में प्रत्येक व्यक्ति घोषित नीतियों के अंतर्गत एक साथ होता है। लेकिन यदि कोई मानता है कि नक्सली समस्या का हल बातचीत से हो सकता है तो वह अपना विचार अभिव्यक्त करने के लिए आजाद है। लेकिन यह आरोप लगाने का कोई कारण नहीं है कि उनका नक्सलियों से कोई संबंध है।"
उन्होंने कहा कि आजाद की मौत पर पश्चिमी मिदनापुर जिले के नक्सल प्रभावित इलाके लालगढ़ में दिए गए रेल मंत्री के बयान में कुछ भी गलत नहीं है।
उन्होंने कहा कि हमने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, गृहमंत्री पी. चिदंबरम और बनर्जी की उपस्थिति में इस मुद्दे पर विस्तृत बातचीत की है। उन्होंने अपनी स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा था कि आजाद को तब मार दिया गया था जब वह केंद्र सरकार से बातचीत शुरू करना चाहता था, इस बात को स्पष्ट किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, "इसके बाद आंध्र प्रदेश सरकार ने आजाद की मौत पर बयान जारी करके स्थिति स्पष्ट की थी। इसलिए इस बयान में कुछ भी गलत नहीं है।"
बनर्जी ने इस बात का संकेत दिया था कि आजाद को फर्जी मुठभेड़ में मारा गया है।
सरकार का कहना है कि आजाद को 2 जुलाई को आंध्रप्रदेश के आदिलाबाद में मुठभेड़ में मारा गया था। बनर्जी का बयान सरकार के रुख से मेल नहीं खाता इसलिए विपक्षी दलों भाजपा और माकपा ने उन्हें निशाना बनाया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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