भारी संख्या में दिल्ली पहुंचे किसान, गुरुवार को घेरेंगे संसद
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में अपनी जमीनों के अधिग्रहण के लिए अधिक मुआवजे को लेकर किसानों का मायावती सरकार से संघर्ष जारी है। बुधवार को किसानों के बंद का आह्वान और उग्र प्रदर्शन भी यूपी सरकार को अब तक झुका नहीं पाया है। हालांकि राज्य के सभी राजनीतिक दल किसानों के इस आंदोलन को समर्थन दे रहे हैं। इसलिए किसानों का उत्साह बरकरार है और वे भी अपनी मांगों के लेकर पीछे हटने के मूड में नहीं है।
किसानों ने अपनी आगे की रणनीति तैयार की है। इसके तहत किसानों का अगला कार्यक्रम संसद के घेराव का है। अब किसान इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार पर भी चढ़ाई करने वाले हैं। संसद घेराव के दौरान किसानों की मांग है कि भूमि अधिग्रभवम विधेयक में संशोधन किया जाए। जिससे किसानों और आम जनता के हित भी सुरक्षित रह सकें। इसके लिए सभी किसान गुरुवार को ब्रिटिश शासन में बने भूमि अधिग्रहण कानून को रद्द करने की मांग को लेकर और अधिक मुआवजा दिये जाने की मांग के साथ संसद के घेराव के लिए रवाना हुए हैं।
आंदोलनकर्ता किसानों की अगुवाई रालोद (राष्ट्रीय लोकदल) के महासचिव और महेंद्र टिकैत कर रहे हैं। पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता अनिल दूबे ने बताया कि किसान भारी संख्या में बसों और रेलगाड़ियों से दिल्ली के लिए रवाना हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस को छोड़कर संसद घेराव के लिए सभी दलों को समर्थन उनको हासिल है। हालांकि भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता ने इसका खंडन करते हुए कहा कि रालोद ने इस संबंध में भाजपा से कोई आग्रह नहीं किया। भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के प्रवक्ता ने भी कहा कि उनका संगठन संसद घेराव के कार्यक्रम में शामिल नहीं है।












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