लोकसभा में कश्मीर पर चर्चा, सांसदों ने जताई चिंता (राउंडअप)

जम्मू एवं कश्मीर की स्थिति पर बहस के दौरान लोकसभा में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी ने केंद्रीय गृह मंत्री पी.चिदंबरम से कहा कि वह कश्मीरियों से स्पष्ट तौर पर कहें कि उनकी 'आजादी' या स्वायत्तता की मांग उचित नहीं है।

जोशी ने कहा, "सरकार कहती है कि उनकी शिकायतें वाजिब हैं। मैं पूछना चाहता हूं कि वे शिकायतें क्या हैं। क्या भारत वहां अपनी सेना भेज रहा है या फिर हम कश्मीर पर कब्जा कर रहे हैं? आजादी की मांग के अलावा उनकी कुछ शिकायतें नहीं हैं। अगर इसी को आप उनकी जायज मांग बता रहे हैं, तो उन्हें स्पष्ट रूप से बता दीजिए कि आजादी या स्वायत्तता संभव नहीं है, यह व्यावहारिक नहीं है।"

संसद में जोशी की इस टिप्पणी पर नेशनल कांफ्रेंस (नेकां) के शैफुद्दीन शारिक और महबूब बेग ने आपत्ति जताते हुए हंगामा शुरू कर दिया।

लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने नेकां सांसदों को किसी तरह शांत कराकर उन्हें वापस अपनी सीट पर वापस भेजा।

कट्टरपंथी अलगाववादी नेता सईद अली गिलानी की टिप्पणी का उल्लेख करते हुए जोशी ने कहा कि केंद्र सरकार को जम्मू एवं कश्मीर में पैसा नहीं लगाना चाहिए। एक या दो प्रतिशत आबादी वाले राज्य को हमारे बजट का 10-12 फीसदी हिस्सा दे दिया जाता है।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) नेता गुरुदास दासगुप्ता ने कहा कि केंद्र सरकार कश्मीरियों की विरक्ति दूर करने के लिए राजनीतिक एवं आर्थिक पहल शुरू करे, ताकि वे खुद को छला हुआ महसूस न करें।

उन्होंने कहा कि वहां 'गतिरोध खत्म कर सामान्य जीवन' बहाल किया जाए।

केंद्रीय मंत्री तथा जम्मू एवं कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि वक्त आ गया है कि पाकिस्तान को 'एक स्वर' में कहा जाए कि वह उसके नियंत्रण वाले कश्मीर के हिस्से तथा चीन को भेंट किए इलाके भारत को लौटा दे।

लोकसभा में तनावग्रस्त कश्मीर घाटी पर चली बहस में भाग लेते हुए अब्दुल्ला ने कहा कि उन्हें ताज्जुब है कि किसी भी सांसद ने पाकिस्तान तथा चीन के नियंत्रण वाले जम्मू एवं कश्मीर के हिस्सों का जिक्र नहीं किया।

उन्होंने कहा, "आज मुझे ताज्जुब हो रहा है कि किसी ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के बारे में बात नहीं की, जिसे वह आजाद कश्मीर कहता है। किसी ने गिलगित बलतिस्तान और स्कार्दू के उत्तरी इलाकों की चर्चा नहीं की तथा किसी ने भी पाकिस्तान द्वारा चीन को दिए गए हिस्से पर बात नहीं की।"

जम्मू एवं कश्मीर की स्वायत्तता बहाल करने की पुरजोर वकालत करते हुए अब्दुल्ला ने कहा कि कश्मीर को यदि भारत का अभिन्न हिस्सा बनाए रखना है तो "आपको हमारे लिए अपने दिलों के दरवाजे खोलने पड़ेंगे।"

अब्दुल्ला ने कहा, "आपको कश्मीरियों का दिल जीतना होगा। जिन लोगों ने अपनी जान गंवाई है, वे न तो नौकरी चाहते हैं और न पैसे। उन्हें न्याय चाहिए।"

उधर, राज्यों के पुलिस महानिदेशकों और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के प्रमुखों के 45वें सम्मेलन के दूसरे दिन अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कश्मीर की स्थिति को गंभीर चिंता का कारण बताते हुए कहा कि प्रदर्शनकारियों से निपटने के लिए गैर घातक तरीकों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

उल्लेखनीय है कि कश्मीर घाटी में फैली हिंसा में 11 जून से ही अब तक 64 लोग मारे जा चुके हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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