किसानों के मुद्दे पर एकजुट हुआ विपक्ष (राउंडअप)

संसद भवन के निकट प्रदर्शन के जाने-पहचाने ठिकाने जंतर-मंतर तथा विशाल रामलीला मैदान में हजारों किसान बसों से उतरे। प्रदर्शन के लिए ये किसान उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा तथा अन्य राज्यों से आए। इस कारण कनाट प्लेस के आसपास के इलाकों में जाम की नौबत रही।

किसानों का समर्थन करते हुए राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) के नेता अजीत सिंह ने कहा, "हम प्रदर्शन तब तक बंद नहीं करेंगे, जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं होंगी।"

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने कहा कि उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में हालात बिगड़ने के लिए प्रदेश और केंद्र दोंनों सरकारें जिम्मेदार हैं। इसका परिणाम यह हुआ कि हाल ही में दो किसानों को जान गंवानी पड़ी।

उन्होंने कहा, "भाजपा किसान-विरोधी कदमों का विरोध करेगी।"

दो किसानों पर गोलियां चलाने वाले पुलिसकर्मियों पर अभियोग चलाने की मांग करते हुए माक्सर्वादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) नेता वृंदा करात ने कहा, "अधिकारी दो किसानों पर गोलियां चलाने वाले पुलिसकर्मियों पर अभियोग चलाएं।"

जनता दल-युनाइटेड (जद-यु) अध्यक्ष शरद यादव ने कहा, "किसानों की उपेक्षा कर भारत आगे नहीं बढ़ सकता। नया भारत किसानों की जमीन से बनाए जाने की जरूरत है। यह वक्त की जरूरत है सरकार किसानों की उपेक्षा बंद करे।"

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती पर प्रहार करते हुए लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) अध्यक्ष राम विलास पासवान ने कहा, "मायावती कांशीराम और खुद की प्रतिमाएं बनावाने पर करोड़ों रुपये खर्च कर सकती हैं तो किसानों को मुआवजा क्यों नहीं दे सकती हैं?"

अलीगढ़ जिले के किसानों का आंदोलन अब एक राजनीतिक मुद्दा बन गया है। उत्तर प्रदेश की सत्तारूढ़ बहुजन समाज पार्टी (बसपा) पुराने भूमि अधिग्रहण कानून के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहरा रही है। कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी, समाजवादी पार्टी और अन्य दल बसपा पर किसानों को गुमराह करने का आरोप लगा रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि अलीगढ़ जिले में 14 अगस्त को पुलिस फायरिंग के दौरान दो प्रदर्शकारियों की मौत के बाद किसानों ने अपना आंदोलन तेज कर दिया है।

बड़ी संख्या में किसानों के पहुंचने से राजधानी के कई इलाकों में यातायात की समस्या पैदा हो गई। नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद और लोनी से हजारों किसानों ने दिल्ली की सीमा में प्रवेश किया।

यातायात पुलिस के एक अधिकारी के अनुसार राजघाट, बाराखंभा रोड, जनपथ, नई दिल्ली रेलवे स्टेशन, दरियागंज, नेहरू मार्ग और टॉलस्टाय मार्ग पर शाम तक यातायात जाम रहा।

किसानों की मांग का समर्थन करते हुए कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने कहा कि किसानों को केंद्र सरकार के खिलाफ रैली करने के बजाय लखनऊ में मायावती सरकार को घेरना चाहिए।

उत्तर प्रदेश के किसान यमुना एक्सप्रेस-वे के लिए अधिक मुआवजे की मांग को लेकर उत्तेजित हैं। इस मार्ग के बनने के बाद दिल्ली और आगरा के बीच के सफर का समय करीब 90 मिनट कम होने का अनुमान है। एक्सप्रेस-वे गौतम बुद्धनगर (नोएडा), अलीगढ़, महामाया नगर (हाथरस) और मथुरा जिलों से होकर गुजरेगा और इसके लिए 115 गांवों की कुल 2,500 हेक्टेयर जमीन अधिगृहीत हुई है।

उत्तर प्रदेश सरकार ने मुआवजे की दर 449 रुपये प्रति वर्गमीटर से बढ़ाकर 570 रुपये प्रति वर्गमीटर कर दी है। परंतु किसानों ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार करते हुए ग्रेटर नोएडा में दिए गए 880 रुपये प्रति वर्गमीटर के बराबर मुआवजा देने की मांग की है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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