कश्मीरियों को नौकरी नहीं 'आजादी' चाहिए : भाजपा
नई दिल्ली, 26 अगस्त (आईएएनएस)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने गुरुवार को संसद में सरकार पर कश्मीर घाटी में तनावपूर्ण हालात से निपटने में नाकाम रहने का आरोप लगाते हुए कहा कि कश्मीरी देश से अलग होने की मांग कर रहे हैं न कि नौकरी या आर्थिक विकास की।
कश्मीर घाटी में फैली हिंसा में 11 जून से ही अब तक 64 लोग मारे जा चुके हैं।
जम्मू एवं कश्मीर की स्थिति पर बहस के दौरान लोकसभा में भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी ने केंद्रीय गृह मंत्री पी.चिदम्बरम से कहा कि वह कश्मीरियों से स्पष्ट तौर पर कहें कि उनकी 'आजादी' या स्वायत्तता की मांग उचित नहीं है।
जोशी ने कहा, "कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और दुनिया की कोई भी ताकत उसे भारत से अलग नहीं कर सकती।"
उन्होंने कहा, "सरकार कहती है कि उनकी शिकायतें वाजिब हैं। मैं पूछना चाहता हूं कि वे शिकायतें क्या हैं। क्या भारत वहां अपनी सेना भेज रहा है या फिर हम कश्मीर पर कब्जा कर रहे हैं? उनकी शिकायतें क्या हैं? आजादी की मांग के अलावा उनकी कुछ शिकायतें नहीं हैं। अगर इसी को आप उनकी जायज मांग बता रहे हैं, तो उन्हें को स्पष्ट रूप से बता दीजिए कि आजादी या स्वायत्तता संभव नहीं है, यह व्यवहारिक नहीं है।"
संसद में जोशी की इस टिप्पणी पर नेशनल कांफ्रेंस (नेकां) के शैफुद्दीन शारिक और महबूब बेग ने आपत्ति जताते हुए हंगामा शुरू कर दिया।
लोकसभाध्यक्ष मीरा कुमार ने नेकां सांसदों को किसी तरह शांत कराकर उन्हें वापस अपनी सीट पर वापस भेजा।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के सर्वदलीय बैठक संबंधी बयान का मखौल उड़ाने वाली कट्टरपंथी अलगाववादी नेता सईद अली गिलानी की टिप्पणी का उल्लेख करते हुए जोशी ने कहा कि केंद्र सरकार को जम्मू एवं कश्मीर में पैसा नहीं लगाना चाहिए।
जोशी ने कहा, "गिलानी कह चुके हैं कि यह बैठकें उनके लिए महत्वपूर्ण नहंी हैं क्योंकि इस तरह की बैठकों से कश्मीर की आजादी हासिल नहीं की जा सकती।"
जोशी ने लोकसभा में कहा, "कश्मीरियों का कहना है कि उन्हें भारत से स्वतंत्रता चाहिए। यदि यह समस्या है तो सरकार इसे कैसे हल करेगी। सरकार उनके साथ किस तरह की बातचीत करेगी। यदि सरकार राज्य को स्वायत्ता देने पर विचार कर रही है तो उसे सोचना चाहिए कि उसके बाद पूर्वोत्तर की क्या स्थिति होगी।"
जोशी ने कहा कि सरकार जम्मू एवं कश्मीर को 94,000 करोड़ रुपये दे चुकी है जहां की आबादी हमारे देश की जनसंख्या का मात्र एक या दो प्रतिशत ही है। यह कल्पना करने वाली बात है कि एक या दो प्रतिशत आबादी वाले राज्य को हमारे बजट का 10-12 फीसदी हिस्सा दे दिया जाता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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