आंतरिक सुरक्षा के मोर्चे पर चुनौतियां गंभीर : प्रधानमंत्री (लीड-1)
नई दिल्ली, 26 अगस्त (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बुधवार को कहा कि इस समय देश की आंतरिक सुरक्षा की चुनौतियां खासकर नक्सली हिंसा की समस्या अधिक गंभीर तरीके से उभरी है और इससे निपटने के लिए काफी अधिक प्रयास करने की जरूरत है।
राज्यों के पुलिस महानिदेशकों और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के प्रमुखों के 45वें सम्मेलन के दूसरे दिन अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा, "भर्ती और बेहतर संस्थागत खुफिया प्रबंध, जांच, तटीय सुरक्षा और आतंकवाद की रोकथाम के क्षेत्र में हमने प्रगति की है लेकिन समस्या अभी भी चुनौतीपूर्ण है।"
नक्सलियों के 'हमारे अपने लोग' होने की बात दोहराते हुए सिंह ने कहा कि यदि वे हिंसा छोड़ दें तो सरकार उनसे वार्ता के लिए तैयार है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार हिंसाग्रस्त इलाकों के विकास के लिए विशेष प्रयास करने के लिए भी प्रतिबद्ध है। इनमें से अधिकांश जनजातीय लोगों के निवास स्थान हैं।
कश्मीर की स्थिति को गंभीर चिंता का कारण बताते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि प्रदर्शनकारियों से निपटने के लिए गैर घातक तरीकों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
सीमा पार आतंकवाद का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार से इतर ताकतों की बढ़ती संख्या चिंता का विषय है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि पूर्वोत्तर की स्थिति आज पहले की तुलना में काफी बेहतर है।
प्रधानमंत्री ने सांप्रदायिक तनावों के बारे में अधिक सतर्क रहने की जरूरत बताई। संचार के आधुनिक साधनों से सांप्रदायिक ताकतें दुष्प्रचार फैलाने और लोगों को बहकाने में अधिक सक्षम हैं।
प्रधानमंत्री ने सुरक्षा उपकरणों की खरीद में विलंब को चिंता का कारण बताते हुए खरीद नीति पर पुनर्विचार की आवश्यकता बताई।
उन्होंने पर्याप्त परीक्षण सुविधाएं, प्रमाणन उपकरणों और आपूर्तिकर्ताओं को सूचीबद्ध करने पर जोर दिया। इससे खरीद के काम में समय और संसाधनों की काफी अधिक बचत होगी।
उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में पुलिस का काम और अधिक जटिल होगा तथा पुलिसकर्मियों के बेहतर प्रशिक्षण को आवश्यक बताया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि 13वें वित्त आयोग ने पुलिस प्रशिक्षण सुविधाओं को बेहतर करने के लिए पर्याप्त कोष उपलब्ध कराया है। उनका शीघ्रता से उपयोग करने की जरूरत है। इस तीन दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन केंद्रीय गृह मंत्री पी.चिदम्बरम ने बुधवार को किया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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