चीन के नवीन ऊर्जा प्रयासों की राह अवरूद्ध
चीन ने वर्ष 2004 में एथेनाल उत्पादन के लिए एक शुरुआती परियोजना आरंभ की थी। इसका उद्देश्य पेट्रोल जैसे परंपरागत ईंधनों पर निर्भरता को कम करना और नवीन ऊर्जा के साधनों को विकसित करना था।
सिंडा सिक्युरिटीज कंपनी के एक विश्लेषक झांग याफेई ने कहा कि एक टन एथेनाल बनाने के लिए तीन टन मक्के की आवश्यकता होती है और इसकी निर्माण लागत 8,000 युआन (1,170 डॉलर) है जबकि पेट्रोल इससे काफी सस्ता है।
समाचार पत्र 'पीपुल्स डेली' ने सोमवार को कहा कि शेनयांग कृषि विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ली जिन्हुआ का मानना है कि मक्के से एथेनाल निर्माण के कारण चीन की खाद्य सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है खासकर ऐसे समय जब वह प्राकृतिक आपदाओं की चपेट में है।
ली ने कहा कि बाढ़ और सूखे के कारण अनाज की आपूर्ति के बारे में हमेशा चिंताएं बनी रहती हैं। इसके कारण मक्के से एथेनाल बनाने का काम शुरू करने की अनुमति देने के बारे में विवाद पैदा हो गया है।
चीन में दुनिया की 20 प्रतिशत आबादी रहती है और उसके पास दुनिया की केवल सात प्रतिशत कृषि भूमि है। बढ़ते औद्योगिकरण और शहरीकरण से कृषि योग्य भूमि कम होती जा रही है और 1.3 अरब की आबादी की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने का दबाव बढ़ता जा रहा है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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