बुर्का पहनने पर जोर नहीं दिया जा सकता : अदालत
ढाका उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने रविवार को सरकार को यह सुनिश्चित करने का आदेश भी दिया कि शैक्षिक संस्थानों में सांस्कृतिक गतिविधियों एवं खेलों पर कतई रोक नहीं रहेगी।
न्यायमूर्ति ए.एच.एम. शमसुद्दीन चौधरी माणिक एवं शेख मोहम्मद जाकिर हुसैन ने एक बांग्ला दैनिक समाचारपत्र में रविवार को प्रकाशित खबर को संज्ञान में लिया। खबर का शीर्षक था 'रानी भबानी महिला कालेज-बोर्का ना पोरले आस्ते माना' जिसका अर्थ है कि रानी भबानी कालेज की छात्राओं को बुर्का नहीं पहनने पर कालेज में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा।
खबर में कहा गया है कि पश्चिम बांग्लादेश के राजशाही जिले के नोटोर स्थित कालेज के प्राचार्य मोजम्मल हक ने कालेज में सांस्कृतिक गतिविधियों एवं खेलों को बंद करवा दिया है तथा छात्राओं को बुर्का पहने बिना कालेज में प्रवेश करने पर रोक लगा दी है।
अदालत ने सरकार को निर्देश दिया है कि वह छात्रों को बुर्का पहनने को विवश करने वाले प्राचार्य के खिलाफ तुरंत र्कावाई करे।
सोमवार को प्रकाशित दैनिक 'स्टार' के मुताबिक अदालत ने इस मामले पर प्राचार्य को 26 अगस्त को स्पष्टीकरण देने के लिए अदालत में हाजिर होने का आदेश दिया है।
अदालत ने सरकार को यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि शैक्षणिक संस्थानों में सांस्कृतिक गतिविधियों एवं खेलों पर प्रतिबंध क्यों लगाया जा रहा है तथा छात्राओं के बुर्का पहनने पर जोर क्यों दिया जा रहा है, जबकि ऐसी कोई वैधानिक घोषणा नहीं की गई है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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