गोवा के लोग रचनात्मक जीवन के अधिकार से वंचित : चर्च
पणजी, 21 अगस्त (आईएएनएस)। गोवा के चर्च ने शनिवार को कहा कि राज्य के निवासी रचनात्मक एवं उत्पादक जीवन जीने के अधिकार से जबरन वंचित कर दिए गए हैं। उल्लेखनीय है कि यहां की आबादी के लगभग 26 प्रतिशत लोग रोमन कैथोलिक हैं।
चर्च ने यह भी कहा कि गोवा का कमजोर, मगर जीने लायक पर्यावरण इस दृष्टि से खतरे में है, क्योंकि विकास के नाम पर पारिस्थितिकी का अनवरत दोहन किया जा रहा है।
सामाजिक न्याय एवं शांति परिषद (सीएसजेपी) के कार्यकारी सचिव फादर मावेरिक फर्नाडिस ने नागरिकों का आह्वान किया है कि वे स्थानीय स्वयंसेवी निकायों में प्रभावी भागीदारी करें, ताकि राज्य सरकार को अपनी जिम्मेदारी का अहसास हो।
फर्नाडिस ने एक बयान में कहा, "इस छोटे राज्य के नागरिक इस दुखद सत्य के प्रति जागरूक हुए हैं और वे रचनात्मक एवं उत्पादक जीवन के अधिकार की मांग कर रहे हैं।"
उन्होंने कहा, "आज की हकीकत यह है कि पर्यावरण और पारिस्थितिकी का संरक्षण एवं संवर्धन अत्यंत आवश्यक हो गया है। विकास एवं आर्थिक समृद्धि के नाम पर भूमि का न केवल इस्तेमाल किया जा रहा है, बल्कि इस कारण लोगों को अपमानित भी होना पड़ रहा है। पारिस्थितिकी की अपूरणीय अधोगति हो रही है तथा लोग मिट्टी, जल एवं वायु प्रदूषण झलने को विवश हैं।"
उन्होंने कहा, "शक्ति-संपन्न लोग महिलाओं, बच्चों एवं युवाओं का उपयोग सेवा की वस्तुओं की तरह कर रहे हैं।"
अधिकारी ने बताया कि गोवा में चर्च आठवें सहस्राब्दी विकास लक्ष्य को पूरा करने पर अपना सहयोग देने को प्रतिबद्ध है। इस विकास लक्ष्य को संयुक्त राष्ट्र के 192 सदस्य देश और कम से कम 23 अंतर्राष्ट्रीय संगठन वर्ष 2015 तक पूरा करने को लेकर सहमत हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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