नेपाली सेना और माओवादी आमने-सामने
काठमांडू, 21 अगस्त (आईएएनएस)। पिछले चार वर्षो से कई प्रतिबंधों से घिरी नेपाली सेना में बेचैनी बढ़ रही है और उसने पहली बार सरकार से सैनिकों और माओवादी सेना की निगरानी करने वाली संयुक्त राष्ट्र एजेंसी का कार्यकाल नहीं बढ़ाने को कहा है। माओवादी एजेंसी का कार्यकाल एक वर्ष और बढ़ाना चाहते हैं।
अपनी चुप्पी तोड़ते हुए नए सेनाध्यक्ष छत्रमान सिंह गुरुं ग ने कार्यवाहक सरकार से नेपाल में संयुक्त राष्ट्र मिशन (यूएनएमआईएन) का कार्यकाल नहीं बढ़ाने को कहा है। संयुक्त राष्ट्र की राजनीतिक संस्था का नेपाल में कार्यकाल 15 सितम्बर को खत्म होने वाला है।
यूएनएमआईएन को माओवादियों के आग्रह के कारण बुलाया गया था। माओवादियों ने वर्ष 2006 में 10 वर्ष पुराना जनयुद्ध समाप्त करने के पहले अपनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए)और नेपाली सेना के सैनिकों और हथियारों की निगरानी के लिए यूएनएमआईएन को बुलाने पर जोर दिया था।
इसने पीएलए की भी जांच की और माओवादियों के पास 19,000 लड़ाके होने को प्रमाणित किया जिससे सेना में उनके प्रवेश का रास्ता साफ हो सके।
बहरहाल माओवादी प्रमुख पुष्प कमल दहाल 'प्रचंड' के एक वीडियो के सामने आने से लड़ाकों के प्रमाणीकरण की प्रक्रिया संकट में फंस गई। वीडियो में प्रचंड ने कहा कि उन्होंने पीएलए के लड़ाकों की संख्या को जानबूझ कर अधिक बताया क्योंकि वास्तव में लड़ाकों की संख्या 7,000-8,000 के करीब थी।
शांति समझौते के छह महीने के भीतर ही पीएलए सदस्यों को नेपाली सेना में शामिल किया जाना था लेकिन उनकी संख्या पर उठे विवाद के बाद सेना ने विद्रोहियों को स्वीकार करने से इंकार कर दिया।
इसे बाद से नेपाल की सत्तारूढ़ पार्टियों की आलोचना के बावजूद यूएनएमआईएन का कार्यकाल छह बार बढ़ाया जा चुका है। उनका आरोप है कि मिशन माओवादियों का पक्ष ले कर अपने अधिकारों का उल्लंघन कर रहा है।
अब जबकि नेपाल में प्रधानमंत्री के चुनाव के चार दौर होने के बावजूद नए प्रधानमंत्री का निर्वाचन नहीं हो सका है तो 15 सितम्बर को खत्म हो रहे यूएनएमआईएन के कार्यकाल तक पीएलए के भविष्य का फैसला नहीं हो पाएगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












Click it and Unblock the Notifications