कंधमाल हिंसा पर तीन दिवसीय ट्रिब्यूनल रविवार से
यह पीपुल्स ट्रिब्यूनल दिल्ली उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश ए. पी. शाह की अध्यक्षता में आयोजित होगा। इस दौरान न्यायाधीश राजेन्द्र सच्चर, एडमिरल विष्णु भागवत, जाने-माने फिल्मकार महेश भट्ट और लेखिका उर्वशी बूटालिया निर्णायक मंडल में शामिल होंगे।
ट्रिब्यूनल में कंधमाल हिंसा की 43 दारु ण घटनाओं के गवाहों की सुनवाई होगी। इसके बाद 24 अगस्त को निर्णायक मंडल अपना फैसला सुनाएगा।
इस दौरान एनपीटी के साथ-साथ छात्र और श्रमिक संगठन अपनी कंधमाल हिंसा से संबंधित प्रस्तुतियां देगें। गीतकार जावेद अख्तर इस दौरान हिंसा ग्रस्त इलाकों से संबंधित लेख और चित्रों की प्रदर्शनी का उद्घाटन करेंगे।
पत्रकारों को आयोजन की जानकारी देते हुए राष्ट्रीय दलित आंदोलन के महासचिव डॉ. आर. प्रसाद ने कहा कि ज्यादातर लोग सोचते हैं कि कंधमाल हिंसा अतीत की बात है लेकिन यह सच नहीं है। कंधमाल हिंसा के जख्म अभी भी लोगों के जेहन में ताजा हैं।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने राहत शिविर हटा लिए हैं लेकिन हिंसा प्रभावित इलाकों के जनजातीय लोग अभी भी राहत शिविरों जैसे हालात में ही हैं।
दलित आर्थिक आंदोलन के महासचिव पॉल दिवाकर ने कहा कि हिंसा का उद्देश्य जनजातीय लोगों को उनके आर्थिक अधिकारों से वंचित करना है। उन्होंने कहा कि यह हिंसा ईसाइयों के खिलाफ नहीं बल्कि समाज में अपनी बेहतर जगह तलाश रहे दलितों के खिलाफ थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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