कश्मीर में फिर गोलीबारी, दो की मौत

अल्ताफ़ हुसैन
बीबीसी संवाददाता, श्रीनगर
भारत प्रशासित कश्मीर के अनेक हिस्सों में शुक्रवार को भारत विरोधी प्रदर्शन हुए हैं और कुछ प्रदर्शनों पर पुलिस की गोलीबारी में दो लोगों की मौत हो गई है.
राजधानी श्रीनगर से क़रीब 45 किलोमीटर दक्षिण में स्थित बिजबहेड़ा में जुमे की नमाज़ के बाद एक प्रदर्शन को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने गोली चलाई जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और एक अन्य घायल हो गया.
पिछले क़रीब दस सप्ताहों के दौरान भारत विरोधी प्रदर्शनों के दौरान कुल मिलाकर लगभग 62 लोगों की जान जा चुकी है. उनमें से 58 की मौत पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों की गोलीबारी में हुई है.
चार लोगों की मौत उस समय हुई थी जब श्रीनगर के निकट एक पुलिस थाने में आग लगाए जाने के बाद विस्फोट हुआ.
पुलिस प्रवक्ता ने कहा है कि बिजबहेड़ा में एक भीड़ ने एक पुलिस थाने पर हमला किया और उसमें आग लगाने की कोशिश की.
पुलिस प्रवक्ता ने कहा कि पुलिस ने पहले तो आँसू गैस छोड़ी लेकिन जब भीड़ नहीं छँटी तो उसे तितर-बितर करने के लिए गोलियाँ चलाईं. अन्य सूत्रों से फ़िलहाल इस घटना का स्वतंत्र विवरण नहीं मिला है.
इससे पहले गुरूवार रात को एक अन्य क़स्बे सोपोर में भारत विरोधी प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की गोलीबारी में एक अन्य व्यक्ति मारा गया.
पिछले क़रीब दस सप्ताहों के दौरान भारत विरोधी प्रदर्शनों के दौरान कुल मिलाकर लगभग 62 लोगों की जान जा चुकी है. उनमें से 58 की मौत पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों की गोलीबारी में हुई है.
चार लोगों की मौत उस समय हुई जब श्रीनगर के निकट एक पुलिस थाने में आग लगाए जाने के बाद विस्फोट हुआ.
चहलपहल भी
पृथकतावादी संगठनों ने गत 25 जून को अनिश्चितकालीन बंद और हड़ताल का आहवान किया था जिसके बाद शुक्रवार को एक दिन की छूट दी गई तो घाटी में जनजीवन कुछ सामान्य नज़र आया.
अधिकारियों ने भी शुक्रवार को कर्फ़्य हटाया. सड़कों पर लोगों और वाहनों की भारी भीड़ नज़र आई और अनेक स्थानों पर तो यातायात जाम भी लगा.
अलबत्ता उत्तरी कश्मीर के अनेक इलाक़ों में अब भी कर्फ़्यू लगा हुआ है, ख़ासतौर से सोपोर, बारामूला, पाटन, कूपवाड़ा और त्रेहगाम में.
सोपोर में लोगों ने कर्फ़्यू तोड़ने की कोशिश की तो पुलिस के साथ उनकी झड़प हो गई.
कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गाँधी ने भी गुरूवार को पार्टी के संसदीय दल की बैठक के दौरान कश्मीर की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि सरकार और राजनीतिक दलों को वहाँ के लोगों तक पहुँचना होगा.
कश्मीर घाटी में पिछले कुछ सप्ताहों से जारी इस तनाव को देखते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी सर्वदलीय बैठक बुलाई थी.
बैठक के बाद उन्होंने कश्मीरी लोगों को संबोधित करते हुए कहा था कि तनाव और ग़ुस्सा छोड़कर एक नई शुरूआत करने की ज़रूरत है.
स्थिति को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी कुछ दिन पहले कहा था कि पुलिस और सुरक्षा बलों को प्रदर्शनकारियों पर बारूदी हथियारों का इस्तेमाल करने में संयम से काम लेना चाहिए और बंदूक और गोली का इस्तेमाल सिर्फ़ अंतिम विकल्प के तौर पर किया जाए.












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