'संघर्ष विराम से ही बातचीत का रास्ता तैयार होगा'

हैदराबाद, 18 अगस्त (आईएएनएस)। नक्सलियों से सहानुभूति रखने वाले लेखक, वरवर राव ने बुधवार को यहां कहा कि सरकार नक्सलियों के साथ बातचीत के प्रति गंभीर नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि केवल संघर्ष विराम ही बातचीत का रास्ता तैयार कर सकता है।

राव ने आईएएनएस से कहा, "वार्ता के पहले नक्सली हिंसा त्याग दें, इस तरह की बात से कुछ भी हासिल नहीं होने वाला। सरकार संघर्ष विराम की बात नहीं कर रही, इससे लगता है कि वह गंभीर नहीं है।"

राव केंद्रीय गृह सचिव जी.के.पिल्लै के उस बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे थे, जिसमें उन्होंने कहा था कि शांति वार्ता शुरू होने से पहले नक्सलियों को हिंसा छोड़नी होगी।

राव चाहते हैं कि कांग्रेस नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार आंध्र प्रदेश की अपनी सरकार का अनुसरण करे, जिसने 2004 में नक्सलियों के साथ बातचीत के लिए आठ महीने के संघर्ष विराम की घोषणा की थी।

राव ने आंध्र प्रदेश में नक्सलियों और सरकार के बीच हुई शांति वार्ता में मध्यस्थता की थी। उन्होंने कहा, "हिंसा त्यागने की बात बकवास शर्त है। नक्सलियों की नजर में राज्य हिंसा में लिप्त है और हिंसा के सभी उपकरण राज्य के हाथों में हैं। नक्सली जो कर रहे हैं वह प्रतिकार और क्रांतिकारी हिंसा है।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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