अलीगढ़ में किसानों की मौत पर संसद में हंगामा (राउंडअप)

लोकसभा की कार्यवाही आरंभ होते ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), समाजवादी पार्टी (सपा) और राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के सदस्यों ने हंगामा शुरू कर दिया। कांग्रेस भी इस मुद्दे पर विपक्षी सदस्यों के साथ दिखी। हंगामा कर रहे सदस्य लोकसभाध्यक्ष मीरा कुमार के आसन के नजदीक पहुंच गए। विपक्षी सदस्य मुआवजा बढ़ाने की मांग कर रहे थे। हंगामा न थमता देख मीरा कुमार ने कार्यवाही 12 बजे तक स्थगित कर दी।

कार्यवाही दोबारा आरंभ होने पर विपक्षी सदस्यों का हंगामा जारी रहा। उत्तर प्रदेश में सत्ताधारी बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के सदस्यों की सपा और भाजपा के कुछ सदस्यों से नोंक-झोंक भी हुई। हंगामा जारी रहने पर लोकसभाध्यक्ष ने कार्यवाही दो बजे तक स्थगित कर दी।

दोपहर दो बजे सदन की बैठक फिर शुरू होने के बाद भी हंगामा जारी रहा और सदन मंगलवार 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया।

लोकसभा में भाजपा ने भूमि अधिग्रहण के संदर्भ में नया कानून बनाने की मांग की। पार्टी के नेता राजनाथ सिंह ने आईएएनएस से कहा, "हम चाहते हैं कि संसद के इसी सत्र में इस संबंध में अध्यादेश लाया जाए ताकि उत्तर प्रदेश और पूरे देश के किसानों को भूमि अधिग्रहण के समय परेशान न होना पड़े।"

इस मसले पर राज्यसभा में भी हंगामा हुआ। नेता प्रतिपक्ष अरुण जेटली ने तत्काल चर्चा की मांग की। इस पर सभापति हामिद अंसारी ने कहा, "यह मसला गंभीर है। प्रश्नकाल चलने दीजिए। इस पर शून्यकाल में चर्चा की इजाजत दी जाएगी।"

राज्यसभा में प्रश्नकाल शुरुआती घंटे में चला लेकिन विपक्षी सदस्यों ने फिर से इस मसले पर हंगामा शुरू कर दिया। परिणामस्वरूप उपसभापति के. रहमान खान ने सदन की कार्यवाही पहले 15 मिनट के लिए और फिर दिन में दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी। सदन में बसपा और भाजपा के सदस्यों में नोंकझोंक भी हुई। दोपहर दो बजे सदन की कार्यवाही शुरू होने के बाद हंगामा जारी रहा और सदन की कार्यवाही मंगलवार 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

दूसरी ओर अलीगढ़ में इस मुद्दे को लेकर तीसरे दिन भी तनाव का माहौल बना रहा। पुलिस की गोलीबारी और एक्सप्रेस वे के लिए अधिग्रहित की जा रही जमीन के लिए मुआवजे की मांग पर रणनीति बनाने के लिए सोमवार को किसानों की महापंचायत बुलाई गई।

महापंचायत के लिए बड़ी संख्या में किसान अलीगढ़ के टप्पल गांव में एकत्र हुए। राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजित सिंह ने भी पंचायत में हिस्सा लिया। बड़ी संख्या में किसानों ने सोमवार को मुख्यमंत्री मायावती के पुतलों को लाठी-डंडों से पीटकर राज्य सरकार के खिलाफ अपने गुस्से का इजहार किया।

मारे गए किसानों के परिजनों के लिए राज्य सरकार द्वारा किए गए मुआवजे के ऐलान और प्रशासिनक फेरबदल के बावजूद किसान झुकने को तैयार नहीं हैं। किसानों की मांग है कि जब तक उनके नेता रामबाबू कथीरिया को रिहा करके ज्यादा मुआवजे की मांग नहीं मानी जाती, तब तक उनका प्रदर्शन जारी रहेगा।

तनाव के मद्देनजर प्रभावित इलाकों में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। सूत्रों के मुताबिक पुलिस को किसानों के प्रति सख्त रवैया न अपनाने के निर्देश दिए गए हैं।

अलीगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सत्येंद्र वीर सिंह ने सोमवार को संवाददाताओं को बताया कि हालात पर काबू पाने के प्रयास किए जा रहे हैं। पिछले करीब 12 घंटे से आगजनी की घटनाएं नहीं हुई हैं। जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी किसानों से बातचीत करने की कोशिश कर रहे हैं।

उधर, किसानों पर की गई फायरिंग के विरोध में मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (सपा) के कार्यकर्ताओं ने राज्य के सभी जिला मुख्यालयों पर धरना प्रदशर्न किया।

सपा के प्रदेश प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने लखनऊ में संवाददाताओं को बताया कि किसानों पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ सपा के कार्यकर्ता हर जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन कर राज्यपाल को ज्ञापन सौंपेंगे।

इससे पहले रविवार देर रात राज्य सरकार ने अलीगढ़ मंडल के मंडलायुक्त व जिलाधिकारी को हटा दिया तथा पूरी घटना की न्यायिक जांच कराने के आदेश दे दिए। राजीव अग्रवाल को नया मंडलायुक्त बनया गया है जबकि के.रविंद्र नायक को नया जिलाधिकारी बनाया गया है।

राज्य सरकार ने रविवार देर शाम अलीगढ़ के एसएसपी विजय प्रकाश को भी हटा दिया। उनके स्थान पर सत्येंद्र वीर सिंह को अलीगढ़ का नया एसएसपी बनाया गया है। मथुरा के एसएसपी बी.डी.पॉल्सन को हटाकर लव कुमार को जिम्मेदारी सौंपी गई है।

सरकार ने मृतकों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये का मुआवजा देने की घोषणा की है।

अलीगढ़ में शनिवार देर रात किसानों और पुलिस के बीच हुए संघर्ष में एक पुलिसकर्मी सहित दो लोगों की मौत हो गई थी और करीब एक दर्जन लोग घायल हो गए थे।

मुद्दे पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के पोलित ब्यूरो सदस्य सीताराम येचुरी ने कहा कि सरकार के पास भूमि अधिग्रहण के लिए कोई नीति नहीं है।

येचुरी ने कहा, "व्यापक पैमाने पर भूमि अधिग्रहण किए जा रहे हैं, लेकिन राहत और पुनर्वास के लिए कोई नीति नहीं है। ऐसा लगता है कि सरकार इस बारे में कुछ नहीं करना चाहती।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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