ओबामा ने किया मस्जिद निर्माण का समर्थन

एक वर्ग इस योजना का विरोध कर रहा है. उनका कहना है कि जिस जगह पर 3000 लोगों की मौत हुई वहाँ ऐसा निर्माण मृतकों के प्रति असम्मान और संवेदनहीनता व्यक्त करना है. न्यूयॉर्क की एक मुस्लिम स्वयंसेवी संस्था कोरडोबा इंस्टिट्यूट ने ये योजना बनाई है. यह संस्था शहर के विभिन्न धर्मों के मानने वालों और मुसलमानों के बीच बेहतर रिश्ते बनाने के लिए भी काम करती है. इससे पहले राष्ट्रपति की ओर से इस बारे में कोई राय ज़ाहिर नहीं की गई थी.
लेकिन राष्ट्रपति ओबामा ने शुक्रवार को जब व्हाइट हाउस में इफ़्तार की दावत दी तो इस अवसर के लिए तैयार किए गए अपने भाषण में उन्होंने न्यूयॉर्क में 'ग्राउंड ज़ीरो' के पास इस्लामिक सांस्कृतिक केंद्र और मस्जिद निर्माण की योजना का समर्थन किया. उन्होंने कहा, "एक नागरिक की तरह और राष्ट्रपति की तरह मैं मानता हूँ कि मुसलमानों को भी अपने धर्म का पालन करने के वैसे ही अधिकार हैं जैसे कि देश में किसी और को हैं."
राष्ट्रपति ओबामा ने कहा, "इसमें लोअर मैनहटन की एक निजी संपत्ति पर स्थानीय नियमों के मुताबिक़ प्रार्थना स्थल और सांस्कृतिक केंद्र बनाने का अधिकार भी शामिल हैं." उनका कहना था,"धार्मिक स्वतंत्रता पर अमरीका की धार्मिक स्वतंत्रता अविचल रहनी चाहिए." इस योजना का विरोध कर रहे लोगों से उन्होंने कहा है कि यदि आतंकवादी हमले करने वाले लोगों और आम मुसलमानों को जोड़कर देखा जाएगा तो यह एक ग़लती होगी. उन्होंने अल-क़ायदा को इस्लाम का विकृत रुप बताया और कहा कि जिन लोगों ने अल-क़ायदा का समर्थन किया और निर्दोष लोगों की हत्या की वो 'आतंकवादी' थे.
बराक ओबामा की इस इफ़्तार दावत में मुस्लिम समुदाय के सौ चुनिंदा मेहमान आमंत्रित थे. जिसमें सऊदी अरब और इंडोनेशिया जैसे कई इस्लामिक देशों के राजदूत और अधिकारी शामिल हैं. राष्ट्रपति ओबामा जानते हैं कि उनकी बात न केवल अख़बारों की सुर्खियाँ बनेंगीं और अमरीका के मुसलमानों के बीच सुनी जाएगी बल्कि पूरी दुनिया के मुसलमानों के बीच यह संदेश जाएगा. हो सकता है कि इससे अमरीका में होने वाले द्विवार्षिक चुनाव में बहस का एक मुद्दा मिल जाए लेकिन यह बराक ओबामा की नीति के अनुरुप ही दिखता है. राष्ट्रपति का पद संभालने के बाद से ही वे दुनिया के मुस्लिम समुदाय से अमरीका के रिश्ते सुधारने के प्रयासों में जुटे हैं.












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