परिजनों को बचाने के लिए 3 दिनों तक हाथ से मिट्टी खोदती रही

उस लड़की को झोउकू इलाके के बीजी गांव से कमर तक के गहरे कीचड़ के गड्ढे से रविवार को निकाला गया। झेंग नाम की उस लड़की को हालांकि अपने परिजनों का कहीं पता नहीं चला।

चोटिल हालत में तीन दिनों तक मिट्टी खोदते रहने के कारण झेंग की हालत खराब हो गई थी। उसे अस्पताल ले जाया गया।

उसने कहा, "मैं अपने माता-पिता को अंतिम बार देखना चाहती थी लेकिन मेरे पैर साथ नहीं दे रहे थे। मैं अपने पैरों पर चल भी नहीं सकती थी।"

भूस्खलन की घटना में झेंग के माता-पिता और उसके भाई की मौत हो गई। उसके पैरों में गहरी चोट है और मृत मांसपेशी को हटाने के लिए उसके पैरों का ऑपरेशन किया जाएगा।

झेंग ने कहा, "मैंने अपने पिता को आंखों के सामने मिट्टी के ढेर में दफन होते देखा है। उन्होंने मुझे धक्का देकर दूर कर दिया। इसके बाद वह मिट्टी में समा गए। मैंने उनके कपड़े देखे थे। मैं मिट्टी हटाकर उन्हें बाहर निकालना चाहती थी लेकिन एक और मिट्टी के ढेर ने उन्हें पूरी तरह दबा दिया।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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