स्टेडियम गिराने पर कैग ने मायावती सरकार की खिंचाई की

राज्य विधानसभा में गुरुवार को रखी गई कैग की रिपोर्ट में इस तथ्य को गंभीरता से लिया गया है कि स्टेडियम और उससे लगे शोध केंद्र सह संग्रहालय की इमारत बमुश्किल से केवल 10 वर्ष पुरानी थी। रिपोर्ट में कहा गया कि सरकार द्वारा इन इमारतों को डायनामाइट से उड़ा देना पूरी तरह गैर कानूनी है।

रिपोर्ट के अनुसार राज्य सरकार ने वर्ष 1998 में लखनऊ के महंगे इलाके गोमती नगर में 15 एकड़ भूखंड में 6.47 करोड़ रुपये की लागत से स्टेडियम बनवाया था। चार वर्ष बाद वर्ष 2002 में एक शोध केंद्र सह संग्रहालय का निर्माण सात एकड़ भूखंड पर 26 करोड़ रुपये की लागत से कराया गया।

रिपोर्ट में इनको गिराने की तकनीकी समिति की सिफारिश पर भी सवाल खड़े किए गए।

रिपोर्ट में कहा गया है कि साफ जाहिर है कि विशेष रूप से नियुक्त तकनीकी समिति की इमारतों को गिराने की मंजूरी केवल आंख में धूल झोंकने का काम है। रिपोर्ट में कहा गया है, "आप इस तथ्य की अनदेखी नहीं कर सकते हैं कि तकनीकी समिति का गठन और इमारतों को ध्वस्त करने की मंजूरी की तिथि एक ही है।"

कैग ने स्टेडियम और शोध केंद्र की जगह मूर्तियां लगाने के राज्य सरकार के फैसले को भी साफ खारिज कर दिया।

विपक्ष ने मायावती को इस मामले पर घेरते हुए इस मुद्दे पर श्वेत पत्र की मांग की।

कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रमोद तिवारी ने कहा कि अब कैग ने मायावती सरकार द्वारा करदाताओं के धन के गंभीर दुरुपयोग को रेखांकित किया है। उनको इस मुद्दे पर श्वेत पत्र देना चाहिए।

विधानसभा में समाजवादी पार्टी के उपनेता अंबिका चौधरी ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा कि कैग ने करदाताओं के धन के दुरुपयोग पर मायावती सरकार की ठीक आलोचना की है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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