'मनमोहन का बातचीत का प्रस्ताव, कश्मीरियों को भटकाने का प्रयास'
जम्मू एवं कश्मीर के एक सर्वदलीय शिष्टमंडल के साथ नई दिल्ली में मंगलवार को हुई बैठक में प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए प्रस्ताव का जिक्र करते हुए उर्दू दैनिक 'नवा-ए-वक्त' ने कहा है कि यदि मनमोहन सिंह अपने वादे के प्रति गंभीर हैं तो "सबसे पहले उन्हें अधिकृत कश्मीर से भारतीय सशस्त्र बलों की वापसी की घोषणा करनी होगी और कश्मीरी लोगों के दमन की कार्रवाई समाप्त करनी होगी।"
अखबार ने लिखा है कि उसके बाद "जेल में बंद या घर में नजरबंद कश्मीरी नेताओं को रिहा करना होगा और उसके बाद बातचीत का निमंत्रण जारी किया जाए।" अखबार ने लिखा है कि बैठक में की गई घोषणाएं पाखंड लगती हैं और कश्मीरियों को दिया गया स्वायत्तता का प्रस्ताव उन्हें उनकी आजादी के लक्ष्य से भटकाने की एक कोशिश थी।
संपादकीय में लिखा गया है कि बातचीत के प्रस्ताव के साथ सरकार द्वारा प्रायोजित कश्मीरी लोगों का उत्पीड़न और विरोध प्रदर्शनों पर जानलेवा हमले अभी भी जारी हैं।
संपादकीय में आगे लिखा गया है, "एक तरफ तो मनमोहन सिंह स्वायत्तता का राग अलापते हैं तो दूसरी ओर भारतीय सुरक्षा बल के लोग कश्मीर घाटी की सड़कों, गलियों और बाजारों में लाठियां और गोलियां बरसा रहे हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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