अफ्रीका से भारत के सीधे संचार तंत्र में 12 देश जुड़ेंगे
विदेश मंत्री एस. एम. कृष्णा 16 अगस्त को इन 12 देशों के मंत्रियों से वीडियो कांफ्रेंस के जरिए सीधा संपर्क स्थापित करेंगे। इससे पहले वर्ष 2009 में 11 देशों के साथ इस तरह का संपर्क स्थापित किया जा चुका है।
विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इस संचार तंत्र के उद्घाटन के लिए अफ्रीकी देशों के विदेश मंत्री और अन्य मंत्री मौजूद रहेंगे। उपग्रह संचार पर आधारित इस प्रणाली के जरिए एस. एम. कृष्णा इन सभी देशों के विदेश मंत्रियों या संबंधित मंत्रियों से वीडियो कांफ्रेंसिग के जरिए बातचीत करेंगे।
इस संचार तंत्र का उद्देश्य इन देशों में टेली-मेडिसिन, टेली-एज्युकेशन और इन देशों के राष्ट्राध्यक्षों के बीच आपसी संपर्क स्थापित करना है।
इस परियोजना के पायलट प्रोजेक्ट के तहत इन देशों के 34 विद्यार्थियों को अपने देशों में रहते हुए ही इंदिरा गांधी मुक्त विश्वविद्यालय से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन के स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में शामिल किया गया था।
वर्ष 2000 से सैकड़ों अफ्रीकी छात्र भारत के प्रमुख विश्वविद्यालयों से जुड़कर वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए अध्ययन कर चुके हैं।
इसके अलावा अफ्रीकी चिकित्सक भी भारतीय चिकित्सकों की संस्था द्वारा संचालित सतत चिकित्सा शिक्षा पाठ्यक्रम के जरिए अपनी शिक्षा जारी रख रहे हैं। इस पाठ्यक्रम के तहत अब तक 658 सत्र पूर्ण किए जा चुके हैं।
इससे पहले फरवरी 2009 में तत्कालीन विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए 11 अफ्रीकी देशों से सीधा संपर्क स्थापित किया था।
भारत ने 47 अफ्रीकी देशों में संचार का यह तंत्र स्थापित करने के लिए समझौता किया है लेकिन अभी 34 देशों में इसके लिए जरूरी आधारभूत संरचना स्थापित हुई है।
इस तंत्र में औपचारिक रूप से जुड़ने जा रहे देश बोत्सवाना, बुरुं डी, इवोरी कोस्ट, जिबूती, इजिप्ट, इरीट्रिया, लीबिया, मलावी, मोजाम्बिक, सोमालिया और युगांडा हैं।
इससे पहले इस तंत्र में शामिल हो चुके देश बेनिन, बुर्किना फासो, गैबून, जाम्बिया, घाना, इथोपिया, मॉरीशस, नाइजीरिया, रवांडा, सेनेगल और सेशेल्स हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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