तापमान में 1 डिग्री कमी दिल के मरीजों के लिए खतरनाक

लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन ने एक शोध के माध्यम से यह निष्कर्ष निकाला है। इस शोध में तापमान और दिल के दौरे के बीच संबंध को ध्यान में रखा गया।

शोध के दौरान 2003 से 2006 के बीच अस्पतालों में दाखिल दिल के दौरों के 84,010 मामलों पर गौर किया गया। साथ ही इसमें ब्रिटिश एट्मॉस्फेरिक डाटा सेंटर से जुटाए गए तापमान संबंधी आंकड़ों का भी अध्ययन किया गया।

शोधकर्ताओं ने पाया कि दिन के औसत तापमान में एक डिग्री गिरावट और दो डिग्री बढ़त दिल के दौरे के खतरे को 28 दिनों तक के लिए बढ़ा सकती है। दो सप्ताह तक दिल के दौरे का सबसे अधिक खतरा रहता है।

यह आंकड़ा कम नजर आता है लेकिन इसे ब्रिटेन के संदर्भ में देखा जाए तब इसकी गंभीरता का पता चलता है। ब्रिटेन में प्रति वर्ष 146,000 दिल के दौरों के मामले सामने आते हैं। इनमें से 11,600 29 दिन की अवधि के दौरान के होते हैं।

इससे सबसे अधिक खतरा 75 से 84 वर्ष की आयुवर्ग के लोगों और दिल की बीमारियों से पीड़ित लोगों को होता है। साथ ही एस्प्रिन का सेवन करने वाले लोग भी तापमान के घटने से बुरी तरह प्रभावित हो सकते हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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