नक्सली हिंसा छोड़ वार्ता के लिए आगे आएं : ममता (लीड-2)
लालगढ़ (पश्चिम बंगाल), 9 अगस्त (आईएएनएस)। रेल मंत्री और तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी ने सोमवार को नक्सलियों से कहा कि वे हिंसा छोड़ दें और वार्ता के लिए आगे आएं। उन्होंने कहा कि वह इस पक्ष में नहीं हैं कि शांति की स्थापना राइफलों के इस्तेमाल से हो।
बनर्जी ने कहा, "आइए, हम शांति प्रक्रिया आज से ही शुरू कर दें। बातचीत शुरू करें। बाधाओं एवं भ्रमों को दूर कर बंगाल भारत को राह दिखाए।"
उन्होंने कहा, "हमें बताएं आप कहां बैठना चाहेंगे। हम सभी बैठना चाहते हैं। यदि मेरी मौजूदगी से शांति प्रक्रिया में समस्या आए और मुझे इससे अलग रखा जाता है तो मैं इसके लिए बुरा नहीं मानूंगी।"
उन्होंने सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं स्वामी अग्निवेश, मेधा पाटकर एवं महाश्वेता देवी जैसे चिंतकों से अपील की कि वे वार्ता में मध्यस्थता करें।
नक्सल समर्थित एवं जनजातीय संस्था पुलिस संत्रास विरोधी जनसाधारण समिति (पीसीएपीए) ने इस रैली को समर्थन दिया। रैली में अग्निवेश, मेधा पाटकर जैसे सामाजिक कार्यकर्ता और नक्सल समर्थक लेखिका महाश्वेता देवी एवं अन्य बुद्धिजीवी उपस्थित थे।
उन्होंने कहा, "मैं हाथ जोड़कर अनुरोध करती हूं, नक्सली कृपया हिंसा छोड़ें, हत्याएं बंद करें। मैं हिंसा में शामिल नक्सली सहित सभी से कह रही हूं कि वे शांति बहाल करने में मदद करें। मेधा जी, स्वामी जी यहां मौजूद हैं। उन्हें नक्सलियों से वार्ता करनी चाहिए और शांति की बहाली सुनिश्चित करनी चाहिए।"
उन्होंने पिछले महीने नक्सलियों के प्रवक्ता चेरुकुरी राजकुमार उर्फ आजाद को 'मारने' के लिए अपनाए गए तरीके की निंदा की।
गैर राजनीतिक रैली में बनर्जी ने कहा, "जो हुआ वह ठीक नहीं है। लोकतांत्रिक प्रक्रिया के प्रति आजाद ने विश्वास जताया था।"
पुलिस ने दावा किया था कि नक्सलियों के तीसरे नंबर के नेता आजाद की आंध्र प्रदेश के आदिलाबाद जिले के जंगलों में मुठभेड़ में मौत हो गई।
बनर्जी ने कहा कि नक्सलियों और सरकार के बीच वार्ता के मध्यस्थ सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश ने आजाद को वार्ता के लिए तैयार किया था।
बनर्जी ने कहा, "यदि किसी पुलिसकर्मी या मीडियाकर्मी या मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) कार्यकर्ता या नक्सली की मौत होती है तो यह समान रूप से दुखद है। सभी मनुष्य हैं। मैं नहीं चाहती कि कोई मारा जाए। मैं मौत पर राजनीति करना नहीं चाहती।"
उन्होंने वाम उग्रपंथियों से अपील की कि वे रेल सेवा को बाधित नहीं करें, क्योंकि इससे आम आदमी का दैनिक जीवन प्रभावित होता है।
यह कहते हुए कि वह नक्सलियों की हिंसात्मक राजनीति की समर्थक नहीं है, बनर्जी ने माकपा एवं मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य से कहा कि वे सोचें कि उनके 34 वर्ष के शासन के बावजूद लालगढ़ आंदोलन क्यों पनपा। उन्होंने कहा, "इसकी वजह है विकास, स्कूलों, कालेजों और अस्पतालों का अभाव। केंद्र सरकार राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (नरेगा) के तहत सरकार केवल 12 दिन के कार्य सुनिश्चित कर सकती है।"
बनर्जी ने कहा कि रामकृष्ण विद्यालय के लिए 20 लाख रुपये जहाजरानी राज्यमंत्री मुकुल रॉय के सांसद कोष से मंजूर किए जाएंगे।
नक्सलियों की ओर इशारा करते हुए उन्होंने पूछा, "आप क्या चाहते हैं? स्कूल, कालेज, वनों पर अधिकार? मैं महसूस करती हूं कि जनजातियों का वनों पर अधिकार होना चाहिए।"
नक्सल प्रभावित क्षेत्र पश्चिम मिदनापुर जिले में आयोजित बड़ी रैली को संबोधित करते हुए बनर्जी ने वादा किया कि वह स्कूलों का जीर्णोद्धार, अस्पतालों, कालेजों की स्थापना जैसे विकास कार्य कराएंगी तथा रेलवे फैक्टरी स्थापित करवाएंगी, ताकि स्थानीय लोगों को रोजगार मिल सके।
केंद्र की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के दूसरे सबसे बड़े घटक की नेता बनर्जी ने कहा कि उनके अधिकार सीमित हैं। उन्होंने कहा, "हम सत्ता में हैं, लेकिन हमारी पार्टी के केवल 19 सांसद हैं। इसलिए यह जरूरी नहीं है कि हम जो कहेंगे, वे (कांग्रेस)सुनेंगे ही।"
रैली में अग्निवेश ने आजाद के मारे जाने की घटना की न्यायिक जांच की मांग करते हुए आरोप लगाया कि प्रशासन ने अपने संचार माध्यमों का इस्तेमाल करके नक्सली नेता का पता लगाया और उसे मार दिया।
नक्सलियों का कहना है कि आजाद और एक अन्य कार्यकर्ता हेमचंद्र पांडे को पुलिस ने गत एक जुलाई को नागपुर से उठाया था और अगले दिन आदिलाबाद में मार डाला था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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