ठेके पर उठती हैं अनचाही कॉल

आप सोच रहे होंगे अनचाही कॉल ठेके पर कैसे उठ सकती हैं? इसका जवाब हम आपको देंगे। लखनऊ, कानपुर से लेकर दिल्ली बेंगलुरू तक हर शहर में छोटे बड़े प्रतिष्ठान हैं। बड़ी कंपनिया अपना खुद का कॉल सेंटर खोल कर अपने उत्पाद मोबाइल फोन के जरिए बेच सकती हैं, लेकिन छंगामल वस्त्रालय, सनशाइन कोचिंग इंस्टीट्यूट, शिवा इलेक्ट्रॉनिक्स, किंग कैटरर्स और कृष्णा बुक मॉल जैसे छोटे-छोटे प्रतिष्ठानों को अगर अपने उत्पाद बेचने हों तो वो कहां जाएं।
कैसे उठता है ठेका
इसी का हल ढूंढ़ निकाला है स्थानीय स्तर पर चल रहीं छोटी-छोटी कंपनियों ने। लखनऊ के इंदिरानगर के भूतनाथ मार्केट में चल रही ऐसी ही एक कंपनी के संचालक मनोज गुपता ने बताया, "हम लोग जगह-जगह सर्वेक्षण कराने वाली कंपनियों, ट्रेड फेयर, कॅरियर फेयर, हेल्थ चेकअप कैंप, आदि में जाकर सर्वे फॉर्म भरवाते हैं और वहां से प्राप्त फोन नंबरों का डाटा बेस बनाते हैं। खास बात यह है कि उस डाटाबेस में 95 प्रतिशत नंबर लखनऊ के ही होते हैं। इसी के समानांतर हम प्रतिष्ठानों से संपर्क कर फोन या मोबाइल पर उनका विज्ञापन करने का वादा करते हैं। प्रतिष्ठान से विज्ञापन का शुल्क मिलने पर उन्हीं नंबरों पर कॉल कर प्रतिष्ठानों का प्रचार करते हैं व उनके उत्पादों के बारे में लोगों को बताते हैं।" मनोज के मुताबिक इन कॉल्स के माध्यम से वो प्रतिष्ठानों के नए उत्पादों के बारे में लोगों को बताते हैं। यही नहीं कॉल के अलावा एसएमएस पर विज्ञापन की सुविधा भी प्रदान करते हैं।
ऐसी कंपनियां सिर्फ लखनऊ में नहीं, बल्कि दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, पुणे, आदि सभी छोटे-बड़े शहरों में चल रही हैं। हर छोटी-बड़ी कंपनियों में आम लोगों के मोबाइल नंबरों का डाटाबेस है, जो निरंतर बढ़ता जा रहा है। ऐसे में केंद्र सरकार के पास सबसे जटिल समस्या यह है कि इन छोटी-छोटी कंपनियों को वो 'डू नॉट कॉल' के दायरे में कैसे ला पाएगी। क्योंकि इसे रोकने में अब तक भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) को भी सफलता नहीं मिल सकी है।












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