बिहार ने मांगी 5,062 करोड़ रुपये की आर्थिक मदद

अधिकारिक सूत्रों के अनुसार जब तक केंद्र की तरफ से आर्थिक मदद नहीं मिलेगी तब तक राज्य सरकार अपने संसाधनों से लोगों को राहत पहुंचाएगी। सरकार द्वारा सभी सूखाग्रस्त जिलों के जिलाधिकारियों को राहत कार्य चलाने का निर्देश दे दिया गया है।

राज्य के ग्रामीण विकास मंत्री भगवान सिंह कुशवाहा ने भी केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के प्रधान सचिव से मिलकर महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत स्वीकृत बजट राशि को शीघ्र जारी करने की मांग की है।

राज्य के आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव व्यासजी ने शनिवार को बताया, "राज्य सरकार ने केन्द्र सरकार को जो प्रस्ताव सौंपा है,जिसमें तत्काल 5062़ 75 करोड़ रुपए की आर्थिक मदद की मांग की गई है। कृषि क्षेत्र (डीजल अनुदान, बीज अनुदान तथा कृषि क्षतिपूर्ति अनुदान) के लिए 1366़ 94 करोड़ रुपये, पशुपालन, पशु चारा और पशु शिविर के लिए 131़ 18 करोड़, खाद्यान्न के लिए 1150़ 68 करोड रुपये , प्रति माह 45005़ 1 किलोलीटर (केएल) किरासन तेल का अतिरिक्त आवंटन, छह वर्ष से कम उम्र के बच्चों के वैकल्पिक पोषक आहार के लिए 88़ 46 करोड़ रुपये की मांग की गई है। "

उन्होंने बताया कि इसके अलावा प्रस्ताव में रोजगार सृजन के लिए मनरेगा के तहत 1903़ 95 करोड़, पेयजल के लिए 77़ 04 करोड़, बिजली के लिए 105़ 74 करोड़ के अलावा 330 मेगावाट की अतिरिक्त उपलब्धता , लघु सिंचाई के लिए 234़ 25 करोड़ रुपये की भी मांग की गई है।

व्यासजी ने बताया कि केन्द्रीय दल भी राज्य के सूखाग्रस्त जिलों का दौरा करने आएगा परंतु यह दल कब आएगा इसकी तिथि निर्धारित नहीं है।

उल्लेखनीय है कि बिहार में बारिश कम होने के कारण राज्य सरकार ने 28 जिलों को सूखाग्रस्त घोषित किया गया है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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