कश्मीरी संघर्ष में हिंसा, आगजनी का कोई स्थान नहीं : गिलानी

श्रीनगर, 4 अगस्त (आईएएनएस)। मुख्य अलगाववादी नेता सैयद अली गिलानी ने बुधवार को लोगों को आगजनी और पत्थरबाजी जैसी हिंसक घटनाओं के प्रति आगाह करते हुए कहा कि कश्मीरियों को 'उत्पीड़ित' दिखना चाहिए, 'उत्पीड़क' नहीं।

हुर्रियत कांफ्रेंस के प्रमुख ने यह बात इलाज के बाद अस्पताल से छुट्टी मिलने पर हैदरपोरा स्थित अपने आवास पर आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कही।

कश्मीर घाटी में 54 दिनों से जारी हिंसक घटनाओं तथा पुलिसकर्मियों के साथ झड़पों में 45 लोगों की मौत होने पर गिलानी ने कहा, "भारतीय शासन के विरुद्ध हमारी लड़ाई में हिंसा एवं आगजनी का कोई स्थान नहीं है।"

गिलानी ने कहा, "हमें गंभीरता से आत्मविश्लेषण करना चाहिए कि ऐसी हरकतों से किसे फायदा होगा। सरकारी संपत्ति और रेलवे स्टेशन को फूंकने के बजाय सुरक्षा बलों के अत्याचार का विरोध करना चाहिए। हमें उत्पीड़ित दिखना चाहिए, उत्पीड़क नहीं।"

उन्होंने लोगों से अपील की कि वे धरना एवं प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से करें। जब सुरक्षा बलों से सामना हो तो प्रदर्शनकारी जमीन पर बैठ जाएं, पत्थरबाजी न करें।

गिलानी ने कहा, "जब मैं श्रीनगर के चश्मा शाही में हिरासत में था, मुख्यमंत्री (उमर अब्दुल्ला) के एक सलाहकार सहित कुछ लोग मुझसे मिलने आए। बातचीत के दौरान उन्होंने जिज्ञासा की कि क्या मेरी लड़ाई राज्य में रक्षक को बदलने के लिए है?"

उन्होंने कहा, "मैंने उन्हें सादगी से कहा कि हमें इससे मतलब नहीं है कि सत्ता में कौन रहे, बल्कि हमारी लड़ाई तो भारतीय शासन के खिलाफ है।"

गिलानी ने दोहराया कि भारतीय नेतृत्व से वार्ता सिर्फ तभी संभव है, जब नई दिल्ली जम्मू एवं कश्मीर के दर्जे के विवाद को कबूल करे और शहरों से सेना को वापस बुलाए।

उन्होंने कहा, "भारत, पाकिस्तान और कश्मीरी लोगों के बीच त्रिस्तरीय वार्ता संभव है।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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